कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में वैश्विक राजनीति को लेकर बड़ा और सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दशकों से चला आ रहा अमेरिका के नेतृत्व वाला नियमों पर आधारित वैश्विक व्यवस्था अब सिर्फ बदल नहीं रही, बल्कि टूट रही है।
अपने भाषण में उन्होंने भारत जैसे मिडिल पावर देशों से एकजुट होकर आगे बढ़ने की अपील की। उनका यह भाषण इतना प्रभावशाली था कि दुनिया भर से आए नेताओं और उद्योगपतियों ने उन्हें खड़े होकर तालियां बजाईं।
‘ताकतवर वही करता है जो वह कर सकता है’
मार्क कार्नी ने कहा, “हम किसी बदलाव के दौर में नहीं हैं, बल्कि एक बड़े टूटाव के दौर में हैं।” उन्होंने साफ कहा कि अब दुनिया उस दौर में पहुंच गई है जहां ताकतवर वही करता है जो वह कर सकता है और कमजोर को वही सेहना पड़ता है।
कार्नी ने बताया कि आज टैरिफ, सप्लाई चेन और वित्तिय सिस्टम को दबाव बनाने के हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सीधा संकेत था अमेरिका की मौजूदा व्यापार और विदेश नीति की ओर, हालांकि उन्होंने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का नाम नहीं लिया।
ट्रंप की टैरिफ धमकी के बीच कार्नी का भाषण
मार्क कार्नी का भाषण ऐसे समय में आया है जब ट्रंप ने सहयोगी देशों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ट्रंप पहने कनाडा को 51वां राज्य कह चुके हैं और स्टील, एल्यूमिनियम, ऑटो और लकड़ी जैसे सेक्टरों पर टैरिफ लगा चुके हैं।
अपने भाषण में कार्नी ने चेतावनी दी कि सिर्फ मान जाने से सुरक्षा नहीं मिलती है। उन्होंने कहा कि छोटे और मध्यम देश अक्सर सोचते हैं कि बड़े देशों की बात मान लेने से वे सुरक्षित रहेंगे, लेकिन यह सोच अब काम नहीं करेगी। कार्नी ने कहा कि अगर हम टेबल पर नहीं है, तो हम मेन्यू पर हैं।
भारत का खास जिक्र
कनाडाई पीएम ने कहा कि बड़े देश अकेले चल सकते हैं, लेकिन मिडिल पावर देशों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने द्विपक्षीय सौदों की आलोचना समझाते हुए कहा कि यह अक्सर सिर्फ नाम की संप्रभुता होती है। उन्होंने ‘वेरिएबलज्योमेट्री’ का सिद्धांत रखा, यानी अलग-अलग मुद्दों पर अलग-अलग देशों के साथ गठबंधन।
इस दौरान भारत का खास जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कनाडा भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत कर रहा है। इसके अलावा ASEAN, थाईलैंड, फिलीपींस और मार्कोसुर देशों के साथ भी व्यापार समझौतों पर का चल रहा है।
सुरक्षा के मुद्दे पर मार्क कार्नी ने अमेरिका के उस रुख का भी जवाब दिया जिसमें ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की बात कही गई है। उन्होंने साफ कहा,” कनाडा ग्रीनलैंड और डेनमार्क के साथ मजबूती के साथ खड़ा है और ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला करने का अधिकार केवल वहीं के लोगों का है।” उन्होंने यह भी दोहराया कि नाटो के आर्टिकल 5 के प्रति कनाडा की प्रतिबद्धता पूरी तरह मजबूत है, भले ही अमेरिका ने यूरोप सहयोगियों पर टैरिफ की धमकी दी हो।
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