पटना। बिहार अग्निशमन विभाग के आईजी एम. सुनील नायक आंध्र प्रदेश पुलिस के सामने अपना बयान दर्ज कराने पहुंच चुके हैं। आंध्र हाईकोर्ट के निर्देशानुसार, नायक पूर्व सांसद के. रघु रामकृष्णा राजू के साथ कथित प्रताड़ना मामले में जांच अधिकारी के समक्ष पेश हुए। गौरतलब है कि आंध्र पुलिस ने पहले नायक को पटना से गिरफ्तार करने की कोशिश की थी, लेकिन दस्तावेजों की कमी के कारण पटना सिविल कोर्ट ने ट्रांजिट रिमांड देने से इनकार कर दिया था।
विवाद की जड़: 2021 का डेप्युटेशन मामला
एडवोकेट कुणाल तिवारी के अनुसार, 2021 में सुनील नायक आंध्र प्रदेश में सीआईडी के डीआईजी थे। उस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री पर अभद्र टिप्पणी के मामले में उन्हें पूर्व सांसद के खिलाफ जांच का आदेश मिला था। नायक की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही सांसद के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। 2023 में नायक बिहार वापस लौट आए। 2024 में आंध्र प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद, पूर्व सांसद ने 2021 की घटनाओं को लेकर केस दर्ज कराया, जिसमें नायक शुरुआत में नामजद नहीं थे।
कानूनी दांवपेंच और कोर्ट का हस्तक्षेप
मामला 2025 में तब गरमाया जब आंध्र पुलिस ने नायक को BNSS 179 के तहत समन भेजा। नायक ने इसे क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या टीम भेजकर दर्ज किया जाए और नायक के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। हालांकि, बाद में आंध्र पुलिस ने उन्हें आरोपी बना दिया।
अगली सुनवाई 9 मार्च को
वर्तमान में आंध्र हाईकोर्ट ने पुलिसिया कार्रवाई पर रोक लगा रखी है। आईजी नायक ने अग्रिम जमानत की अर्जी भी दाखिल की है, जिस पर अगली सुनवाई 9 मार्च को होनी है। फिलहाल, पूछताछ जारी है और बिहार के वरिष्ठ अधिकारी लगातार नायक के संपर्क में बने हुए हैं।
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