पटना। शहर स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में बन रहा 1200 बेड का मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर है। संस्थान प्रशासन और BMSICL ने इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का कड़ा लक्ष्य रखा है। यह अस्पताल न केवल बिहार बल्कि पड़ोसी राज्यों के मरीजों के लिए भी वरदान साबित होगा।

​अत्याधुनिक सुविधाओं का महाजाल

​संस्थान के निदेशक प्रो. बिन्दे कुमार के अनुसार, इस नए ब्लॉक के हर फ्लोर पर अलग-अलग सुपर स्पेशियलिटी विभाग होंगे। इसमें 160 बेड की इमरजेंसी, 12 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (OT) और 90 बेड का हाई-टेक ICU शामिल है। आधुनिक संक्रमण नियंत्रण प्रणाली और उन्नत उपकरणों की मौजूदगी से सर्जरी के बाद रिकवरी दर में सुधार होगा।

​फ्लोर-वाइज सुविधाओं का विवरण

​अस्पताल का ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि मरीजों को भटकना न पड़े:
​ग्राउंड फ्लोर: यहां 164 बेड की इमरजेंसी और 6 OT होंगे, ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल जीवनरक्षक उपचार मिल सके।
​प्रथम व द्वितीय तल: यहां गैस्ट्रो सर्जरी, स्त्री रोग (60 बेड), प्रसूति वार्ड और 150 बेड का विशाल शिशु रोग विभाग संचालित होगा। साथ ही मनोचिकित्सा के लिए अलग वार्ड की व्यवस्था है।
​तृतीय व चतुर्थ तल: यहां पीएमआर (पुनर्वास), नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और न्यूरोलॉजी विभाग होंगे। सामान्य सर्जरी के लिए भी 120 बेड सुरक्षित रखे गए हैं।
​पांचवां व छठा तल: ये फ्लोर न्यूरोसर्जरी और जटिल ऑपरेशनों के लिए समर्पित हैं। यहां 12 मॉड्यूलर ओटी कॉम्प्लेक्स और रिकवरी के लिए प्री व पोस्ट-ओटी वार्ड बनाए गए हैं।

​बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में नई क्रांति

​वर्तमान में जटिल सर्जरी के लिए मरीजों को राज्य से बाहर जाना पड़ता है, लेकिन इस विस्तार के बाद किडनी, न्यूरो और गैस्ट्रो जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज एक ही छत के नीचे संभव होगा। यह परियोजना बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं को वैश्विक मानकों के करीब ले जाने की एक ठोस कोशिश है।