पटना। इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) ने स्वास्थ्य सेवाओं में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। संस्थान में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा फिर से बहाल कर दी गई है, जिससे यह गैस्ट्रो सर्जरी विभाग में इस तकनीक का उपयोग करने वाला बिहार का पहला सरकारी अस्पताल बन गया है।

​पहली सफल सर्जरी और लाभार्थी

​हाल ही में संस्थान में दो मरीजों की सफल रोबोटिक सर्जरी की गई। पहली मरीज शिवहर की एक 26 वर्षीय महिला थी, जो पिछले तीन वर्षों से गॉल ब्लॉडर (पित्त की थैली) की पथरी से परेशान थी। दूसरा मरीज सीवान का 55 वर्षीय पुरुष था, जो हर्निया और गॉल ब्लॉडर की समस्या से ग्रसित था। गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष मंडल के नेतृत्व में डॉ. साकेत कुमार और उनकी टीम ने इन जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

​तकनीक की खासियत: AI और 3D विजन

​डॉ. साकेत कुमार के अनुसार, यह रोबोटिक सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से लैस है। यह सर्जरी के दौरान किसी भी छोटी सी गड़बड़ी को तुरंत पकड़ने में सक्षम है। यह सर्जनों को 3D विजन और अंगों की हाई-डेफिनिशन इमेज प्रदान करता है, जिससे ऑपरेशन के दौरान ऊतकों को नुकसान पहुंचने का खतरा न के बराबर रहता है।

​मरीजों को होने वाले प्रमुख लाभ

​रोबोटिक सर्जरी पारंपरिक सर्जरी की तुलना में कई मायनों में बेहतर है:

​सटीकता: सर्जन के हाथों की तुलना में रोबोटिक आर्म्स अधिक सूक्ष्म और सटीक काम करते हैं।

​रिकवरी: छोटे चीरे लगने के कारण मरीज को दर्द कम होता है और वह तेजी से स्वस्थ होता है।

​कम जोखिम: ऑपरेशन के दौरान रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा न्यूनतम होता है।

​किफायती: अस्पताल में कम समय रुकने के कारण मरीज का अतिरिक्त खर्च बचता है।

​भविष्य की योजनाएं

​संस्थान के निदेशक डॉ. बिंदे कुमार और उपनिदेशक डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने इस सफलता पर पूरी टीम को बधाई दी। डॉ. सिन्हा ने साझा किया कि जल्द ही इस तकनीक का विस्तार हड्डी रोग समेत अन्य विभागों में भी किया जाएगा, जिसके लिए डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।