CG News : सत्या राजपूत, रायपुर. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में सहायक प्राध्यापकों और कनिष्ठ वैज्ञानिकों को परिवीक्षा अवधि के दौरान नियमों का उल्लंघन कर दिए गए लाखों रुपये के एरियर्स भुगतान को शासन द्वारा गठित जांच कमेटी ने नियम विरुद्ध बताया है. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इन राशियों की वसूली की सिफारिश की है. जिससे लाभ लेने वाले सहायक प्राध्यापक और वरिष्ठ वैज्ञानिकों से 10 लाख से लेकर 25 लाख रुपये तक की रिकवरी हो सकती है.

जांच कमेटी ने दस्तावेजों के गहन परीक्षण के बाद पाया कि विश्वविद्यालय ने 2003, 2005 और 2007 में जारी विज्ञापनों के अनुसार NET योग्यता को शिथिल करते हुए नियुक्तियां की थीं. इनमें 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में NET उत्तीर्ण करने की शर्त रखी गई थी लेकिन कई शिक्षकों को NET पास करने में 5 से 8 वर्ष लग गए. शासन ने समय-समय पर परिवीक्षा अवधि बढ़ाई. साथ ही NET अनिवार्यता को शिथिल करने का अधिकार नहीं होने की स्पष्ट हिदायत दी थी. इसके बावजूद, विश्वविद्यालय प्रशासन ने असफल परिवीक्षा अवधि के दौरान भी एरियर्स का भुगतान किया और पदोन्नति के साथ आर्थिक लाभ दिए. यह मामला लंबे समय से विवादास्पद रहा है और विधानसभा में भी जोर-शोर से उठाया गया था.

कमेटी की रिपोर्ट और अनुशंसाएं

शासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय कमेटी में राज्य संपरीक्षा क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर के संयुक्त संचालक और दो संयुक्त संचालक वित्त शामिल थे. समिति ने तीन माह की जांच के बाद रिपोर्ट सौंपी है. कमेटी ने स्पष्ट रूप से एरियर्स भुगतान को नियम विरुद्ध माना और राशि वसूली की अनुशंसा की है. सूत्रों के अनुसार प्रभावित सहायक प्राध्यापकों, कनिष्ठ वैज्ञानिकों से 10 लाख से 25 लाख रुपये तक की वसूली हो सकती है.

बता दें कि पहले भी विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच कमेटी ने इसी तरह की अनियमितता पाई थी. एरियर्स वसूली और असफल परिवीक्षा अवधि को सेवा अवधि में न गिनने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने उस रिपोर्ट को दबा दिया था.

ये है मामला

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने वर्ष 2003, 2005 और 2007 में सहायक प्राध्यापक, कनिष्ठ वैज्ञानिक की सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था. इसमें नेट की अनिवार्य अर्हता को शिथिल करते हुए 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में नेट परीक्षा उत्तीर्ण करने की शर्त पर नियुक्ति आदेश जारी किया गया था. निर्धारित अवधि में नेट परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करने के कारण प्रबंध मंडल के प्रस्ताव पर शासन ने समय-समय पर सशर्त परिवीक्षा अवधि बढ़ाई. शासन ने विवि को यह भी निर्देश दिया कि शासन को नेट परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता को शिथिल करने का अधिकार नहीं है. कई सहायक प्राध्यापकों को नेट उत्तीर्ण करने में 5 तो किसी को 7-8 साल लग गए. इतना ही नहीं नियमों को दरकिनार करते हुए असफल परिवीक्षा अवधि के बावजूद प्राध्यापकों कनिष्ठ वैज्ञानिकों को उस समय अवधि का एरियर्स दिया गया. साथ ही पदोन्नति के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी दिया गया है.

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. प्रभावित सहायक प्रबंधक अध्यापकों और वैज्ञानिकों में हड़कंप मचा हुआ है. शासन अब रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय लेगा, जिसमें वसूली प्रक्रिया और संभावित अन्य कार्रवाई शामिल हो सकती है.