आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। भानपुरी वन परिक्षेत्र में चिड़ियाघर बनाए जाने की खबर ने ऐसी उड़ान भरी की जमीन अधिग्रहण की आशंका से भयभीत ग्रामीण धरना-प्रदर्शन करने लग गए. मौका देखकर नेताजी भी मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों के आंदोलन का समर्थन कर दिया. लेकिन वन विभाग ने स्पष्ट किया कि चिड़ियाघर निर्माण और विस्थापन की बात पूरी तरह भ्रामक हैं. शासन की मंशा इको-टूरिज्म के जरिए स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने की है.
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भानपुरी वन परिक्षेत्र में चिड़ियाघर बनाए जाने की खबर ने ग्राम खड़गा सहित सालेमेटा, छुरावण्ड, जामगांव और कमेला के ग्रामीणों को चिंता में डाल दिया. जमीन अधिग्रहण के साथ विस्थापन की आशंका पर खड़गा गांव में प्रभावित ग्रामीणों ने धरना-प्रदर्शन कर चिड़ियाघर निर्माण का विरोध शुरू कर दिया.
विस्थापन की आशंका ने बढ़ाई चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 1980 में इसी क्षेत्र में कोसारटेडा बांध के निर्माण के दौरान उन्हें विस्थापन का दंश झेलना पड़ा था. अब एक नए प्रोजेक्ट के नाम पर फिर से विस्थापन की आशंका ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है, इसी कारण वे चिड़ियाघर निर्माण का विरोध कर रहे हैं.
बैज और कश्यप ने दिया समर्थन
खबर सुनकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और नारायणपुर के पूर्व विधायक चंदन कश्यप भी धरना स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों के आंदोलन को समर्थन दिया. लेकिन वन विभाग के अधिकारियों ने मामले में स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि भानपुरी क्षेत्र में किसी भी प्रकार का चिड़ियाघर बनाने की कोई योजना नहीं है. उन्होंने इसे पूरी तरह भ्रामक जानकारी करार दिया.
इको-टूरिज्म विकसित करने की योजना
मामले पर बस्तर वन मंडल के मुख्य वन संरक्षक आलोक तिवारी ने बताया कि कोसारटेडा बांध के पास स्थित वन खंड को आपस में जोड़कर इको-टूरिज्म गतिविधियों को विकसित करने की योजना है. यहां बड़े वाटर बॉडी को ध्यान में रखते हुए वाटर एक्टिविटी, पर्यटकों के लिए ठहरने की व्यवस्था और अन्य पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएंगी.
भूमि अधिग्रहण का नहीं कोई प्रस्ताव
उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो किसी भी रहवासी के विस्थापन की कोई योजना है और न ही भूमि अधिग्रहण का कोई प्रस्ताव है. सभी गतिविधियां वन खंड की सीमा के भीतर ही की जाएंगी और इन योजनाओं से स्थानीय लोगों को जोड़कर उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे. चिड़ियाघर निर्माण और विस्थापन से जुड़ी खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं.
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