पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबंद। जिले में अवैध खनन पर कार्रवाई के बड़े-बड़े दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत ये है कि न संसद में उठी आवाज़ का असर दिखा और न ही विधानसभा में हुई चर्चा का कोई ठोस नतीजा निकला। नतीजा यह कि महानदी के घाटों पर अवैध खनन बेखौफ जारी है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

सांसद ने संसद में उठाया मुद्दा, पर कार्रवाई नदारद
महासमुंद की सांसद रूपकुमारी चौधरी ने 19 मार्च को संसद में नियम 377 के तहत महानदी में हो रहे अवैध खनन का मामला उठाया था। उन्होंने साफ कहा था कि इस खनन से महानदी का अस्तित्व खतरे में है और पारिस्थितिकी तंत्र भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उन्होंने राजिम, महासमुंद और धमतरी के घाटों का ज़िक्र करते हुए सरकार से इस पर सख्त रोक लगाने की मांग की थी।

लेकिन हकीकत यह है कि गरियाबंद जिले के पीतई बंद, कोपरा, तर्रा, परसदा जोशी जैसे घाटों पर अवैध खनन आज भी बदस्तूर जारी है। इससे माइनिंग विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि सांसद के मुद्दा उठाने के बावजूद कार्रवाई का नामोनिशान तक नहीं दिख रहा।
विधानसभा में उठा मामला, 4 करोड़ का जुर्माना तय लेकिन वसूली शून्य
भाजपा विधायकों धरमलाल कौशिक और राजेश मूणत ने भी विधानसभा में अवैध खनन का मामला उठाया था। परसदा जोशी में नवंबर 2021 से नवंबर 2023 तक दो खदानों की लीज मंजूर की गई थी, लेकिन लीज खत्म होने के बाद भी यहां 80 हजार घन मीटर रेत की अवैध खुदाई कर ली गई।
संयुक्त निरीक्षण में इस अवैध खनन की पुष्टि हुई और तत्कालीन पट्टेदार संकल्प जंघेल, सरपंच सुनीता सोनी, पंच बेनराज सोनी और हार्दिक सोनवानी को दोषी ठहराते हुए 4 करोड़ 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अक्टूबर 2024 में माइनिंग विभाग ने दोषियों को पत्र जारी कर जुर्माना भरने को कहा, लेकिन आज तक एक भी पैसा वसूला नहीं जा सका।

तत्कालीन सरपंच पति ने दी सफाई
इस मामले में तत्कालीन सरपंच के पति बेनराज सोनी ने सफाई दी है। उनका कहना है कि जब लीज खत्म हो गई थी, तब भी पंचायत लगातार राजस्व और माइनिंग विभाग को अवैध खनन की जानकारी दे रही थी। लेकिन कार्रवाई न करने वाले अफसरों पर कोई सवाल नहीं उठाए गए, बल्कि पंचायत को ही दोषी बना दिया गया।
माइनिंग अधिकारी से संपर्क करना भी मुश्किल
गौरतलब है कि महानदी में अवैध खनन रोकने के लिए कोई हेल्पलाइन नंबर नहीं जारी किया गया है। ऐसे में अफसरों के मोबाइल नंबर पर ही सूचना दी जाती है, लेकिन जब भी जिले के सहायक माइनिंग अधिकारी रोहित साहू को कॉल किया गया, उनका फोन हमेशा ‘व्यस्त’ ही मिला। आधे घंटे में 30 बार कॉल करने के बाद भी संपर्क नहीं हो सका। मैसेज भेजने पर भी कोई जवाब नहीं आया।
जिले में राजनीतिक संरक्षण के बिना अवैध खनन का इतना बड़ा खेल नहीं चल सकता। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार और प्रशासन इस पर क्या कदम उठाते हैं या फिर ये मामला भी बाकी मुद्दों की तरह सिर्फ बहस बनकर रह जाएगा?
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