नेपाल में बालेंद्र शाह की अगुवाई वाली नई सरकार अस्तित्व में आ गई है. नई सरकार के आते ही नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली समेत कई नेताओं को पिछले साल जेन जेड के विरोध-प्रदर्शनों पर कार्रवाई को लेकर गिरफ्तार कर लिया गया. अब साथ ही भारत से लगी सीमा पर भी हलचल बढ़ गई है. सीमा पर जॉइंट सर्वे भी शुरू कर दिया गया है और लगातार कार्रवाई की जा रही है. सीमा पर जॉइंट सर्वे को लेकर दोनों देशों के कई बड़े अफसर बैठक में शामिल हुए.

नेपाल में PM के तौर पर बालेन शाह के पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार भारत-नेपाल संयुक्त सीमा सर्वेक्षण टीम-3 की पहली अंतरराष्ट्रीय बैठक श्रावस्ती जिले के कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई.

प्रधानमंत्री के तौर पर बालेन शाह के पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार भारत-नेपाल संयुक्त सीमा सर्वेक्षण (India-Nepal Joint Border Survey Team) टीम-3 की पहली अंतरराष्ट्रीय बैठक कल उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई. इस बैठक में दोनों देशों के कई वरिष्ठ अफसरों ने हिस्सा लिया.

सशस्त्र सीमा बल (SSB) की अलग-अलग बटालियनों के कमांडेंट, साथ ही नेपाल के पुलिस अधीक्षक भी इस अवसर पर मौजूद थे. बैठक में शामिल दोनों ओर से पुलिस और जंगल विभाग के भी कई अधिकारी मौजूद थे.

राज्य सरकार की ओर से श्रावस्ती के DM को सर्वे टीम-3 के लिए नोडल अधिकारी और टीम लीडर नियुक्त किया गया है, जो सभी संबंधित गतिविधियों की देखरेख और समन्वय करेंगे.

इस बीच भारत और नेपाल में ‘नो मैंस लैंड’ यानी सीमा के बीच की खाली जमीन पर कड़ी निगरानी रखने की दिशा में काम शुरू कर दिया है. दोनों देशों ने अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे 7 जिलों में, जिनमें बिहार के पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जिला भी शामिल हैं, एक जॉइंट सर्वे शुरू किया है. इसका मकसद ‘नो मैंस लैंड’ से अतिक्रमण हटाना और घुसपैठ पर रोक लगाना है.

उम्मीद जताई जा रही है कि यह साझा सर्वे एक महीने के अंदर पूरा कर लिया जाएगा, जिससे देनों देशों की खुली सीमा पर तालमेल और प्रबंधन को मजबूती मिलेगी.

SSB की 47वीं बटालियन के कमांडेंट संजय पांडे ने इस कार्रवाई पर बताया, “बॉर्डर की पवित्रता बनाए रखने के लिए कार्रवाई की जा रही है और किसी भी अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.” उम्मीद है कि FST 15 दिनों के अंदर गृह मंत्रालय को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप देगी.

भारत और नेपाल के बीच जॉइंट फील्ड सर्वे टीमों (FST) की पहली बैठक 24 मार्च को रक्सौल में सशस्त्र सीमा बल (SSB) के मुख्यालय में हुई. बैठक में दोनों देशों के सीमावर्ती जिलों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया. यह बैठक पूर्वी चंपारण के DM सौरभ जोरवाल की अगुवाई में हुई. इसमें सीमा स्तंभों के रखरखाव और सुरक्षा से जुड़े कई तकनीकी मुद्दों पर भी चर्चा हुई. सर्वे के दौरान सीमा स्तंभों की जांच की जाएगी, खराब स्तंभों की मरम्मत होगी, नए स्तंभ बनाए जाएंगे और गायब निशानों को फिर से लगाया जाएगा. इस बीच, दोनों ओर के अधिकारियों ने ‘नो मैंस लैंड’ से अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिया है.

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