ऑनलाइन के अतिरिक्त होगी अब प्रदेश में पढ़ाई-लिखाई की वैकल्पिक व्यवस्था, लाउडस्पीकर स्कूल” और “बुलटू के बोल” से पढ़ेंगे बच्चे, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा दिशा-निर्देश जारी

रायपुर। पढ़ई तुंहर दुआर योजना में ऑनलाइन के अतिरिक्त बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी की जाएंगी, जिससे बच्चों को ऑनलाइन के बिना भी शिक्षा उपलब्ध हो सके। राज्य शासन ने अब यह विचार किया है कि पढ़ई तुंहर दुआर में ऐसे घटक भी जोड़े जाए जिनके लिए ऑनलाइन की आवश्यकता न हो। इसमें गांवों तथा मोहल्लों में समुदाय की सहायता से बच्चों के सीखने-पढ़ने की व्यवस्था, लाउडस्पीकर स्कूल और बुलटू के बोल जैसे घटकों को जोड़ा जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने कोरोना संक्रमण के समय बच्चों की पढ़ाई-लिखाई जारी रखने के संबंध में इन योजनाओं को शत-प्रतिशत स्कूलों में लागू करने के संबंध में सभी जिला कलेक्टरों, जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी और संकुल समन्वयकों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि वर्तमान में कोरोना महामारी द्वारा संक्रमण को देखते हुए स्कूल के खुलने के संबंध में अनिश्चितता है। ऐसी स्थिति में बच्चों के सीखने-पढ़ने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं करना आवश्यक है। राज्य सरकार ने इसके लिए पढ़ई तुंहर दुआर योजना प्रारंभ की है। इस योजना का एक महत्वपूर्ण घटक ऑनलाइन पढ़ाई है जिसे cgschool.in के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के लगभग 20 लाख बच्चों और 2 लाख शिक्षक ऑनलाइन के माध्यम से सिखाने-पढ़ाने के कार्यक्रम से जुड़े हुए है।

राज्य शासन ने अब यह विचार किया है कि पढ़ई तुंहर दुआर में ऐसे घटक भी जोड़े जाए जिनके लिए ऑनलाइन जाने की आवश्यकता न हो। इसमें गांवों तथा मोहल्लों में समुदाय की सहायता से बच्चों के सीखने-पढ़ने की व्यवस्था, लाउडस्पीकर स्कूल और बुलटू के बोल जैसे कार्यक्रम यथाशीघ्र प्रारंभ किए जाने का प्रयास किया जाएगा।

गांव और मोहल्लों में समुदाय की सहायता से बच्चों की सीखने-पढ़ने की व्यवस्था करना :- इसके लिए शिक्षक उन सभी गांवों में समुदाय के महत्वपूर्ण व्यक्तियों से संपर्क स्थापित करेंगे जिसमें बच्चे उनके स्कूल में पढ़ने आते हैं। समुदाय के महत्वपूर्ण व्यक्तियों से अनुरोध करेंगे कि वे गांव, मोहल्ले में ही बच्चों के सीखने-पढ़ने की व्यवस्था करें। शिक्षक इन गांवों, मोहल्लों में जाने के लिए अपना स्वयं का एक कैलेण्डर तैयार करेंगे और निश्चित तिथि और समय पर गांव, मोहल्ले में जाकर समुदाय की सहायता से बच्चों को सिखाने-पढ़ाने में सहायता करेंगे। इस संबंध में वैकल्पिक पाठ्यक्रम और पढ़ाई के तरीकों के बारे में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश शीघ्र जारी किए जाएंगे। समग्र शिक्षा द्वारा बच्चों की दी जाने वाली सीखने-पढ़ने के संबंध में भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। इस कार्यक्रम में जो शिक्षक स्वेच्छा से भाग लेना चाहते है उनके लिए एक गूगल फार्म भी तैयार किया गया है।

लाउडस्पीकर स्कूल

वीडियों कांफ्रेंसिंग के दौरान कई शिक्षकों ने बताया कि पंचायतों की सहायता से लाउडस्पीकर द्वारा गांव में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। विचार है कि इस योजना को प्रदेश के सभी पंचायतों में विस्तारित किया जाए। इसके लिए भी शिक्षकों और पंचायतों को स्वेच्छा से भाग लेने के लिए एक गूगल फार्म तैयार किया गया है।

बुलटू के बोल

कई शिक्षकों ने वीडियों कांफ्रेंसिंग के दौरान बताया कि वे ऑडियों पाठों को एक मोबाईल से दूसरे मोबाईल द्वारा ब्लूटूथ के माध्यम से पहुंचाया जा रहा है। इसमें इंटरनेट की आवश्यकता नहीं होती और यह फीचर फोन पर भी काम करता है। इस योजना का विस्तार ट्राइबल क्षेत्रों के सभी हाट बाजारों द्वारा किए जाने का विचार है। इसके लिए स्वेच्छा से काम करने वाले व्यक्तियों की जानकारी गूगल फार्म पर डाला जा सकता है।

प्रमुख सचिव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इन योजनाओं में शामिल होने के लिए किसी भी शिक्षक पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डाला जाए और उन्हीं शिक्षकों को शामिल किया जाए जो स्वेच्छा से इन योजनाओं में शामिल होना चाहते हैं। इन योजनाओं में केन्द्र शासन और राज्य शासन द्वारा समय-समय पर कोविड-19 के संबंध में जारी सभी निर्देश का पालन भी सुनिश्चित करने कहा गया है।

डॉ. आलोक शुक्ला ने कहा है कि बहुत शिक्षक से स्वेच्छा से इन कार्यक्रमों में जुड़ना चाहते है और बिना निर्देश के भी अपने-अपने क्षेत्रों में शिक्षकों को सिखाने-पढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि राज्य शासन के निर्देशों से और ऐसे शिक्षकों के प्रयासों को बल मिलेगा तथा बच्चे बेहतर ढंग से पढ़ सकेंगे।

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