24 विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ, स्पीकर भी बदले, क्या चुनाव में सफल होगा ‘नो रिपीट फॉर्मूला’?

गुजरात. गुजरात में एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है. यहां बीजेपी ने अपने मुख्यमंत्री को बदलने के बाद अब सरकार के पूरे मंत्री मंडल को बदल दिया है. विजय रुपाणी को हटाकर पहली बार विधायक बने भूपेंद्र पटेल को सत्ता की कमान सौंप दी गई है. वहीं, ‘नो रिपीट’ फॉर्मूला को अपनाते हुए बीजेपी ने अपने पुराने मंत्रियों की जगह सभी नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया है. यहां तक की गुजरात में विधानसभा स्पीकर को भी बदल दिया गया है.

भारतीय राजनीति में पहली बार बीजेपी ने गुजरात में यह प्रयोग किया है. ऐसे में अब ये देखना है कि गुजरात में अगले साल अक्टूबर-नवबंर में होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को नए चेहरों को आगे बढ़ाने का क्या सियासी लाभ मिलता है. भूपेंद्र पटेल की सरकार के मंत्रिमंडल में कुल 24 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली है, जिनमें से 10 कैबिनेट और 14 राज्यमंत्री बनाए गए हैं.

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मंत्री के तौर पर राजेंद्र त्रिवेदी, जीतू वाघानी, राघव पटेल, पूर्णेश मोदी, नरेश भाई पटेल, प्रदीप सिंह परमार, अर्जुन सिंह चव्हाण, ऋषिकेश पटेल, कनुभाई देसाई और किरीट सिंह राणा ने शपथ ली है. वहीं, राज्य मंत्री के तौर पर हर्ष सांघवी, बृजेश मेरजा, मनीषा वकील, जगदीश भाई पांचाल, जीतू भाई चौधरी, निमिषा सुतार, मुकेश पटेल, अरविंद रैयाणी, कुबेर डिंडोर, कीर्ति सिंह वाघेला, गजेंद्र सिंह परमार, देवा भाई मालम, राघवजी मकवाना, विनोद भाई मोराडिया ने शपथ लिया है.

विधानसभा अध्यक्ष भी बदल गए

गुजरात में मुख्यमंत्री और मंत्री ही नहीं बल्कि विधानसभा अध्यक्ष को भी बदल दिया गया है. 2017 में विधानसभा स्पीकर का पद संभालने वाले राजेंद्र त्रिवेदी ने गुरुवार को इस्तीफा देकर भूपेंद्र पटेल सरकार में कैबिनेट मंत्री बन गए हैं. राजेंद्र त्रिवेदी की जगह बीजेपी ने निमा आचार्य को स्पीकर बनाया है. आचार्य ने भी विधानसभा अध्यक्ष के तौर पर शपथ ली है.

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बीजेपी की सियासी प्रयोगशाला है गुजरात

गुजरात को बीजेपी की सियासी प्रयोगशाला के लिए जाना जाता है. बीजेपी ने ‘नो रिपीट’ को गुजरात के नगरीय निकाय चुनाव में अपनाया था और पुराने चेहरे को हटाकर नए चेहरों को मैदान में उतारा था, जिसका पार्टी को फायदा हुआ था. 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को कांटे की टक्कर देने वाली कांग्रेस पार्टी का नगरीय निकाय चुनाव में सफाया हो गया था.

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