नई दिल्ली। राजधानी की लाइफलाइन मानी जाने वाली दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) में यात्रियों की संख्या लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। कोरोना काल के बाद मेट्रो नेटवर्क के विस्तार और नई लाइनों के शुरू होने से सफर करने वालों की संख्या में बड़ा उछाल देखने को मिला है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 के मुकाबले पिछले साल यात्रियों की संख्या बढ़कर 235.8 करोड़ तक पहुंच गई। वहीं, एक दिन में सर्वाधिक 81 लाख से अधिक यात्रियों ने मेट्रो से सफर कर नया रिकॉर्ड बनाया।
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली मेट्रो के विस्तार, खासकर मैजेंटा और पिंक लाइन के नए कॉरिडोर शुरू होने से कनेक्टिविटी बेहतर हुई है, जिससे यात्रियों की संख्या में तेजी आई है। दिल्ली मेट्रो अब देश के कुल मेट्रो यात्रियों का लगभग 55 फीसदी भार अकेले संभाल रही है, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता और भरोसे को दर्शाता है। नए कॉरिडोर जुड़ने के साथ भारत का मेट्रो नेटवर्क भी तेजी से विस्तार कर रहा है और इसी के चलते देश अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क बन चुका है।
यात्रियों की संख्या में बनाया रिकॉर्ड
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के अनुसार, कोरोना काल के बाद राजधानी में मेट्रो यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। महामारी के दौरान सेवाएं प्रभावित होने से जहां यात्रियों की संख्या में गिरावट आई थी, वहीं अब हालात सामान्य होने के बाद इसमें तेज उछाल देखने को मिल रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में कुल 223.5 करोड़ यात्राएं दर्ज की गई थीं, जिसमें औसतन प्रतिदिन 62.39 लाख लोग मेट्रो से सफर कर रहे थे। वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 235.8 करोड़ पहुंच गई, और औसत दैनिक यात्री संख्या 64.60 लाख हो गई। इस दौरान दिल्ली मेट्रो ने 8 अगस्त को एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया, जब एक ही दिन में 81,87,674 यात्राएं दर्ज की गईं जो अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है।
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क
आंकड़ों के अनुसार, देश के 26 शहरों में 1,143 किलोमीटर से अधिक लंबाई में मेट्रो सेवाएं संचालित हो रही हैं। इन नेटवर्क्स के जरिए हर दिन करीब 1.15 करोड़ यात्री सफर करते हैं, जो सार्वजनिक परिवहन के बढ़ते उपयोग को दर्शाता है। इस उपलब्धि में दिल्ली मेट्रो की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है, जो अकेले देश के कुल मेट्रो यात्रियों का लगभग 55 फीसदी भार संभाल रही है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) द्वारा लगातार नेटवर्क विस्तार, नई लाइनों का संचालन और बेहतर सेवाओं ने यात्रियों को मेट्रो की ओर आकर्षित किया है।
समय की पाबंदी में 99.9 फीसदी का रिकॉर्ड
DMRC के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क अब 416 किलोमीटर तक फैल चुका है, जिसमें कुल 303 स्टेशन शामिल हैं। दिल्ली मेट्रो न सिर्फ देश की सबसे बड़ी मेट्रो प्रणालियों में से एक है, बल्कि संचालन और समय की पाबंदी के मामले में भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है। DMRC के मुताबिक, मेट्रो हर दिन 343 ट्रेनों के जरिए लगभग 4,508 फेरे (ट्रिप) लगाती है और कुल मिलाकर करीब 1.40 लाख किलोमीटर की दूरी तय करती है। सबसे खास बात यह है कि दिल्ली मेट्रो की समय की पाबंदी (पंक्चुअलिटी) 99.9 प्रतिशत है, जो इसे दुनिया की सबसे भरोसेमंद पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रणालियों में शामिल करती है।
चालक रहित ट्रेनें संचालित
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के अनुसार, दिल्ली मेट्रो तकनीकी रूप से दुनिया की सबसे बड़ी ‘चालक रहित’ (ड्राइवरलेस) मेट्रो प्रणालियों में से एक बन चुकी है। फेज-4 के तहत हाल ही में दो नए कॉरिडोर मजेंटा लाइन एक्सटेंशन (दीपाली चौक–मजलिस पार्क) और पिंक लाइन एक्सटेंशन (मौजपुर–मजलिस पार्क) पर परिचालन शुरू होने से मेट्रो नेटवर्क का और विस्तार हुआ है। इससे दिल्ली-एनसीआर में कनेक्टिविटी बेहतर हुई है और यात्रियों को अधिक सुविधाजनक यात्रा विकल्प मिल रहे हैं। वर्तमान में पिंक लाइन (71.55 किमी) और मजेंटा लाइन (49.19 किमी) पर कुल 80 ड्राइवरलेस ट्रेनें संचालित हो रही हैं। ये ट्रेनें अत्याधुनिक सिग्नलिंग और ऑटोमेशन सिस्टम से लैस हैं, जिससे संचालन अधिक सुरक्षित, सटीक और समयबद्ध हो गया है।
तेजी से चल रहा निर्माण कार्य
भविष्य की बढ़ती यात्री मांग को देखते हुए मेट्रो नेटवर्क के विस्तार पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण (फेज-4) के प्राथमिकता वाले कॉरिडोरों का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। DMRC द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, आगामी परिचालन को सुचारू बनाने के लिए कुल 52 नई ट्रेनों की खरीद की जा रही है। इनमें से 18 ट्रेनें पहले ही प्राप्त हो चुकी हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से संचालन में शामिल किया जाएगा।
मेट्रो के विस्तार और नई ट्रेनों के जुड़ने से यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलने के साथ ही भीड़भाड़ को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। दिल्ली मेट्रो ने राजधानी में यात्रा को न केवल तेज और सुविधाजनक बनाया है, बल्कि सड़क यातायात के दबाव को कम कर जाम से राहत दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई है। साथ ही, यह पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देकर प्रदूषण कम करने में भी योगदान दे रही है।
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