फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब का कहना है कि भारत की पहल पर ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया है कि भारत ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष में दखल दे सकता है। उन्होंने कहा कि हमने विदेश मंत्री जयशंकर को बातचीत और सीजफायर की अपील करते हुए हुए देखा है। इस युद्ध से वैश्विक ऊर्जा पर संकट मंडरा रहा है। तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। स्टब ने सोमवार को ब्लूमबर्ग टेलीविज़न पर एक इंटरव्यू में यह बात कही।

स्टब ने इंटरव्यू में कहा, “हमने विदेश मंत्री जयशंकर को सीज़फ़ायर और बातचीत की अपील करते देखा, ताकि माहौल शांत हो सके और हालात स्थिर हो जाएं…” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच चल रहा यह त्रिकोणीय संघर्ष चीज़ों को कितना पेचीदा बना देता है। स्टब ने NATO के सहयोगी देशों से भी अपील की कि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बात पर ध्यान दें। जो देश मदद करना चाहेंगे, वे ज़रूर करेंगे। बता दें कि रविवार को ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा था कि NATO और एशिया में उनके सहयोगी देशों को यह सुनिश्चित करने में मदद करनी चाहिए कि तेल और गैस की खेप इस अहम जलमार्ग से बिना किसी रुकावट के गुज़रती रहे।

जयशंकर की ईरान के साथ बातचीत

अलेक्जेंडर स्टब हाल ही में भारत के दौरे पर भी आए थे और रायसीना डॉयलॉग में शिरकत की थी। स्टब की ये टिप्पणियां ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे उस भीषण संघर्ष के बीच की हैं, जिसका असर खाड़ी के दूसरे देशों पर भी पड़ रहा है। जिस बात ने चिंताओं को और बढ़ा दिया है, वह है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ की नाकेबंदी। दुनिया के तेल की खपत का पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुज़रता है, और यह भारत समेत कई देशों के लिए एक बेहद अहम जलमार्ग है।

स्टब, विदेश मंत्री (EAM) एस. जयशंकर की अपने ईरानी के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ हाल ही में हुई बातचीत का ज़िक्र कर रहे थे। इस बातचीत के बाद ही, फ़ारसी खाड़ी में स्थित इस अहम होर्मुज़ स्ट्रेट से भारत के झंडे वाले कुछ जहाज़ों को गुज़रने की अनुमति मिली थी।

फ़ाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में, जयशंकर ने हाल ही में यह साफ़ किया था कि जहाज़ों को गुज़रने देने के बदले में ईरान को कुछ भी नहीं मिला। उन्होंने कहा किभारत और ईरान के बीच हमेशा से ही सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “और हम इस संघर्ष को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं।”

क्या भारत अमेरिका को होर्मुज़ की सुरक्षा में मदद कर सकता है?

फिनलैंड के प्रधानमंत्री पहले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं, जिन्होंने यह सुझाव दिया हो कि भारत के दखल से ईरान और अमेरिका के बीच का संघर्ष शांत हो सकता है। रविवार को अमेरिका के ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने संकेत दिया कि भारत, अमेरिका को होर्मुज़ स्ट्रेट को सुरक्षित करने में मदद कर सकता है। यह तेल का एक अहम रास्ता है, जहां अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि देश के सहयोगी अपने जंगी जहाज़ भेजें, ताकि यह रास्ता सामान्य रूप से काम करता रहे।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वे उन देशों के खास नाम बता सकते हैं जो होर्मुज़ स्ट्रेट को सुरक्षित करने में मदद करेंगे, तो राइट ने कोई औपचारिक घोषणा करने से मना कर दिया, लेकिन अपने जवाब में भारत का ज़िक्र भी किया। उन्होंने कहा, “पूरी दुनिया होर्मुज़ से होने वाले प्रवाह पर निर्भर है, और सबसे अहम बात यह है कि एशियाई देश जैसे जापान, कोरिया, चीन, थाईलैंड, भारत, अपनी कुल ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज़ से ही पाते हैं।”

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