India-EU Free Trade Deal: दुनिया की आर्थिक और विश्व व्यापार राजनीति (World Business Politics) तेजी से बदल रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की संरक्षणवादी नीतियों और बेवजह ऊंचे टैरिफ (Tariff) के चलते अब कई बड़े देश अमेरिका पर निर्भरता कम करने की रणनीति अपना रहे हैं। इस ग्लोबल चेंज के सेंटर में भारत एक मजबूत और भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में उभर रहा है। यही कारण है कि इंग्लैंड के बाद यूरोपीय यूनियन यानी ईयू (27 यूरपिए देशों का समूह) ने भारत के साथ बड़ी फ्री ट्रेड डील की है। भारत-ईयू फ्री ट्रेड डील ग्लोबल GDP का 25% है। यूरोपीय यूनियन के बाद ट्रंप की धमकियों से परेशान दो देश ब्राजील और कनाडा भी इंडिया संग बड़े ट्रेड करने की तैयारी में जुट गए हैं।
अमेरिका के करीबी सहयोगी रहे कनाडा ने भी अपनी विदेश और व्यापार नीति में बड़ा बदलाव शुरू कर दिया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च के पहले सप्ताह में भारत दौरे की तैयारी कर रहे हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी और उसे 51वां अमेरिकी राज्य कहकर विवाद खड़ा किया है।

कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद ने दावोस में स्पष्ट कहा कि कनाडा कभी भी अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा। उन्होंने यह भी बताया कि कनाडा अगले दस वर्षों में अमेरिका के बाहर अपने निर्यात को दोगुना करना चाहता है। इसी रणनीति के तहत भारत और चीन को प्रमुख साझेदार के रूप में चुना गया है।
ब्राज़ील का भारत पर भरोसा, ग्लोबल साउथ की नई धुरी
ग्लोबल साउथ के देशों में भी भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा फरवरी में भारत दौरे पर आ रहे हैं। वे एक बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत पहुंचेंगे और भारतीय उद्योगपतियों के साथ व्यापक बातचीत करेंगे।
भारत-यूरोपीय संघ FTA बना गेमचेंजर
इस ग्लोबल चेंज का सबसे बड़ा उदाहरण भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता है, जिस पर 27 जनवरी 2026 को हस्ताक्षर हुए। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे मदर ऑफ ऑल डील्स कहा है. यह समझौता दुनिया की लगभग 25 प्रतिशत ग्लोबल GDP और करीब दो अरब लोगों को जोड़ता है। इसके तहत यूरोपीय संघ भारत को भेजे जाने वाले लगभग 97 प्रतिशत उत्पादों पर टैरिफ घटाएगा या खत्म करेगा, जबकि भारत भी चरणबद्ध तरीके से 93 प्रतिशत यूरोपीय उत्पादों पर टैरिफ हटाएगा। इससे भारत में यूरोपीय कारें, वाइन, चॉकलेट और प्रोसेस्ड फूड सस्ते होंगे, जबकि भारतीय टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग और आईटी उत्पादों को यूरोप में बड़ा बाजार मिलेगा।
ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति हो रही धराशयी
अमेरिका की गलत नीतियों के कारण उसके साथी ही उसका साथ नहीं दे रहे हैं। ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी देने के बाद से यूरोप के कई देश नाराज हैं। इसमें अमेरिका के बेस्ट फ्रेंड और नाटो सहयोगी इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम, डेनमार्क है। सभी ने ट्रंप की इस नीति का डटकर विरोध किया। वहीं ट्रंप की वेनेज़ुएला पर हमला करना और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अमेरिका लाने का भी कई देशों ने विरोध किया। आज शायद ही कोई ऐसा देश न हो, जो ट्रंप की गलत नीतियों के कारण नाराज न हो। इसके कारण अब अमेरिका से सहयोगी देश भी भारत को मजूबत और भरोसेमंद साथी के रूप में देख रहे हैं। वहीं भारत भी ट्रंप की भारीभरम टैरिफ की काट खोजकर विश्व व्यापार राजनीति का सिकंदर बनने की राह में आगे बढ़ रहा है।
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