India First Openly LGBTQ MP Menaka Guruswamy: भारत की राजनीति में इतिहास रचा गया है। देश को पहला ओपन एलजीबीटीक्यू सांसद मिला है। भारत की पहली ओपन एलजीबीटीक्यू सांसद मेनका गुरुस्‍वामी बन गईं हैं। सुप्रीम कोर्ट की सीनियर एडवोकेट को TMC ने राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया था। डॉ. मेनका गुरुस्वामी सुप्रीम कोर्ट की एक जानी-मानी वरिष्ठ वकील हैं, जो LGBTQ+ अधिकारों को कानूनी मान्यता दिलाने और संवैधानिक कानून को आगे बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका के लिए मशहूर हैं। यह कदम भारत में LGBTQ+ समुदाय के प्रतिनिधित्व के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गुरुस्वामी एक जानी-मानी संवैधानिक वकील हैं, जिन्होंने 2018 के सुप्रीम कोर्ट केस में अहम भूमिका निभाई थी। इस केस में धारा 377 के कुछ हिस्सों को रद्द कर दिया गया था, जिससे भारत में समलैंगिकता को प्रभावी रूप से अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया।

मेनका गुरुस्वामी सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट हैं और कई संवैधानिक मामलों में अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने 1997 में भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल अशोक देसाई के साथ काम करते हुए कानून की बारीकियां सीखीं। मेनका उन्हें अपना मेंटर मानती हैं। किरण मनराल की किताब राइजिंग: 30 वीमेन हू चेंज्ड इंडिया में भी मेनका गुरुस्वामी को शामिल किया गया है।

बड़े-बड़े संस्थानों में की पढ़ाई

मेनका का जन्म 1974 में हैदराबाद में हुआ था। नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, ऑक्सफोर्ड (रोड्स स्कॉलर, BCL और D.Phil) और हार्वर्ड लॉ स्कूल से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने एक विशिष्ट करियर बनाया। उन्होंने येल लॉ स्कूल, NYU स्कूल ऑफ लॉ और यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो फैकल्टी ऑफ लॉ में विजिटिंग फैकल्टी के तौर पर पढ़ाया है, साथ ही कोलंबिया लॉ स्कूल में बीआर अंबेडकर रिसर्च स्कॉलर और लेक्चरर के रूप में काम किया है, जहां उनका मुख्य जोर संघर्ष के बाद उभरे लोकतंत्रों में संवैधानिक संरचना पर रहा है।

कौन हैं मेनका की पार्टनर?

मेनका गुरुस्वामी की पार्टनर अरुंधति काटजू हैं, जो खुद भी एक वकील हैं. इंडियन पीनल कोड (IPC) की धारा 377 के खिलाफ केस लड़ने वालों में मेनका गुरुस्वामी और उनकी पार्टनर अरुंधति काटजू हैं। 2009 में दिल्ली हाई कोर्ट ने धारा 377 को निरस्त कर दिया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट में तब मेनका और अरुंधति ने मिलकर केस लड़ा था। 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया था और धारा 377 को फिर से लागू कर दिया था। एक इंटरव्यू में मेनका और अरुंधति ने कहा था, ‘2013 की हार एक वकील के तौर पर तो हार थी ही लेकिन ये व्यक्तिगत हार भी थी। उन्होंने आगे कहा था, ‘एक क्रिमिनल होना अच्छा नहीं है, जिसे दूसरे केस में बहस करने के लिए वकील के तौर पर वापस कोर्ट में जाना पड़े। मेनका और अरुंधति को 2018 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद दुनियाभर में तारीफ मिली. सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को निरस्त कर दिया। इसके बाद दोनों का नाम TIME मैग्जीन के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में शामिल किया गया था।

TMC सांसद मेनका गुरुस्वामी पहली LGBTQ सांसद बनीं

  • मेनका भारत की पहली ओपन LGBTQ सांसद बनीं।
  • 51 वर्षीय मेनका ने आर्टिकल 377 इंडियन पीनल कोड (IPC) के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • 2018 में LGBTQ कम्युनिटी के हक में आवाज उठाई और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद समलैंगिकता को अपराध की कैटेगरी से हटाया गया था।
  • मेनका गुरुस्वामी ने 1997 में भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल अशोक देसाई के साथ काम किया है।
  • 2001 में मेनका ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से BCL और हार्वर्ड लॉ स्कूल से LLM किया।
  • 2017 से 2019 तक मेनका न्यूयॉर्क के कोलंबिया लॉ स्कूल में बीआर आंबेडकर रिसर्च स्कॉलर और लेक्चरर रहीं।
  • मेनका ने ‘राइट टू एजुकेशन’ से जुड़े केस में भी अहम भूमिका निभाई।
  • राइट टू एजुकेशन के तहत, प्राइवेट स्कूलों में गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया।
  • 2019 में मेनका और उनकी पार्टनर अरुंधति काटजू को टाइम मैगजीन ने दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में शामिल किया था।
  • मेनका का पोर्ट्रेट ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रोड्स हाउस के मिलनर हॉल में लगाया गया है,वो ये सम्मान पाने वाली पहली भारतीय और दुनिया की दूसरी महिला हैं।
  • LGBTQ में लेस्बियन,गे, बाइसेक्शुअल और ट्रांसजेंडर आते हैं। एक अनुमान के मुताबिक दुनियाभर में इस कम्युनिटी के लोगों की हिस्सेदारी करीब 9% है।
  • भारत में इस कम्युनिटी से आने वाले लोगों की संख्या 20 लाख से ज्यादा है।

क्या है LGBTQ संगठन

एलजीबीटीक्यू (LGBTQ) का फुल फॉर्म लेस्बियन (Lesbian), गे (Gay), बाईसेक्सुअल (Bisexual), ट्रांसजेंडर (Transgender) और क्वीर/क्वेश्चनिंग (Queer/Questioning) है। यह एक समावेशी शब्द है जो विभिन्न यौन रुझानों (sexual orientations) और लैंगिक पहचानों (gender identities) वाले व्यक्तियों के समुदाय को दर्शाता है, जो पारंपरिक विषमलिंगी (heterosexual) मानदंडों से अलग हैं। 

विस्तृत अर्थ (LGBTQIA+):

  • L – Lesbian (लेस्बियन): वे महिलाएं जो दूसरी महिलाओं के प्रति आकर्षित होती हैं।
  • G – Gay (गे): वे पुरुष जो दूसरे पुरुषों के प्रति आकर्षित होते हैं।
  • B – Bisexual (बाईसेक्सुअल): वे लोग जो पुरुष और महिला दोनों के प्रति आकर्षित हो सकते हैं।
  • T – Transgender (ट्रांसजेंडर): वे व्यक्ति जिनका जेंडर (लिंग पहचान) उनके जन्म के समय निर्धारित लिंग से अलग होता है।
  • Q – Queer/Questioning (क्वीर/क्वेश्चनिंग): ऐसे लोग जो अपनी यौन पहचान या जेंडर के बारे में अभी निश्चित नहीं हैं या जो मुख्यधारा की लैंगिक परिभाषाओं में खुद को फिट नहीं मानते।
  • I – Intersex (इंटरसेक्स): वे लोग जिनके जैविक यौन लक्षण (genitalia/chromosomes) विशिष्ट पुरुष या महिला परिभाषाओं में नहीं आते।
  • A – Asexual (असेक्सुअल): वे लोग जो किसी भी तरह के यौन आकर्षण का अनुभव नहीं करते हैं।
  • + (Plus): यह चिन्ह अन्य पहचानों को शामिल करता है, जैसे पैनसेक्सुअल या टू-स्पिरिट, जो इस संक्षिप्त नाम में नहीं हैं।

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