PM मोदी शुक्रवार को 2 दिन के जापान दौरे पर पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने टोक्यो में आयोजित 15वें भारत-जापान समिट में हिस्सा लिया। समिट में मोदी और जापानी पीएम इशिबा की मौजूदगी में कई MoU एक्सचेंज किए गए। भारत-जापान के बीच चंद्रयान-5 मिशन को लेकर एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं। यह मिशन दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) का जॉइंट ऑपरेशन होगा। इसमें दोनों मिलकर चांद के दक्षिणी ध्रुव की स्टडी करेंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की साझेदारी से भारत में बड़े पैमाने पर बुलेट ट्रेन के विस्तार का ऐलान किया है।

समिट में इशिबा ने भारत में अगले 10 सालों में 10 ट्रिलियन येन (करीब 6 लाख करोड़ रुपए) निवेश करने की बात कही है। वहीं, मोदी ने अगल भारत-जापान समिट के लिए इशिबा को भारत आने का न्योता भी दिया।

7,000 KM तक बुलेट ट्रेन का लंबा नेटवर्क बनाने का लक्ष्य

पीएम मोदी ने जापान में शुक्रवार को कहा कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) भारत और जापान के बीच एक प्रमुख परियोजना है। हमारा लक्ष्य कुछ वर्षों में इस पर यात्री सेवाएं शुरू करना है। इस दौरान उन्होंने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के अतिरिक्त देश में 7,000 किलोमीटर तक हाई स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन का) लंबा नेटवर्क बनाने का लक्ष्य है।

बुलेट ट्रेन का अधिकांश हिस्सा ‘मेक इन इंडिया’

प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के अखबार ‘योमिउरी शिंबुन’ को दिए गए साक्षात्कार में कहा कि इसका अधिकांश हिस्सा ‘मेक इन इंडिया’ के माध्यम से विकसित किया जाएगा। ताकि यह कार्यक्रम टिकाऊ और व्यवहारिक हो। उन्होंने कहा, “मैं इस प्रयास में जापानी कंपनियों की सक्रिय भागीदारी का स्वागत करता हूं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत-जापान सहयोग में उच्च-गति रेल के अलावा परिवहन के अन्य क्षेत्रों को भी जोड़ने की क्षमता है, जिनमें बंदरगाह, विमानन, जहाज निर्माण, सड़क परिवहन, रेलवे और लॉजिस्टिक्स शामिल हैं, जहां भारत ने महत्वाकांक्षी पहल की है। मोदी ने कहा, “स्पष्ट रूप से, इन क्षेत्रों में जापान की तकनीकी बढ़त, भारत की व्यापकता, विनिर्माण और नवाचार शक्ति के साथ मिलकर दोनों पक्षों के लिए अपार मूल्य सृजित कर सकती है।”

मोदी 8वीं बार जापान के दौरे पर गए

बतौर प्रधानमंत्री यह मोदी की 8वीं जापान यात्रा है। स्थानीय कलाकारों ने टोक्यो के होटल में उनका गायत्री मंत्र से स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने प्रवासी भारतीयों से भी मुलाकात की। PM मोदी ने यहां 15वें भारत-जापान वार्षिक समिट में हिस्सा लिया। इस सम्मेलन में दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।

उन्होंने रवाना होने से पहले सोशल मीडिया पर लिखा कि इस दौरे का मकसद भारत और जापान के बीच खास रणनीतिक और ग्लोबल साझेदारी को मजबूत करना है। जापान के बाद मोदी 31 अगस्त को चीन पहुंचेंगे।

जापान अगले एक दशक में करेगा 10 ट्रिलियन का निवेश

पीएम मोदी ने कहा कि जापान अगले एक दशक में भारत में 10 ट्रिलियन का निवेश करेगा। भारत ने जापान के साथ अगले एक दशक तक के लिए टारगेट सेट कर दिया है। पीएम मोदी ने बताया कि भारत में जापानी कंपनियों की संख्या लगातार बढ़कर लगभग 1,500 हो गई है, जबकि 400 से अधिक भारतीय कंपनियां जापान में काम कर रही हैं। यह तो महज शुरुआत है, वास्तविक संभावनाएं इससे कहीं अधिक हैं। हमें बड़ा लक्ष्य रखना चाहिए और महत्वाकांक्षी बने रहना चाहिए। हमारे बीच महत्वपूर्ण व्यापारिक संबंध हैं। मुझे विश्वास है कि नए प्रयासों से हम अपने व्यापार क्षेत्र में विविधता ला सकते हैं, इसे अधिक संतुलित बना सकते हैं और नए क्षेत्र भी खोल सकते हैं।”

जापान 21वीं सदी में भारत के नवाचार का अहम साथी

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि 21वीं सदी में जापान, भारत के नवाचार, विनिर्माण और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एक प्रमुख भागीदार के रूप में उभरेगा। जापानी कंपनियों के भारत में अपने उत्पादन केंद्रों को अफ्रीका जैसे तीसरे देशों के बाजारों के लिए केंद्र के रूप में स्थापित करने की खबरों पर मोदी ने कहा कि भारत में बहुआयामी सुधार हुए हैं, जिससे विनिर्माण पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है। जापान सहित कई वैश्विक कंपनियां न केवल हमारे घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए, बल्कि विश्व भर की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी भारत में अपना उत्पादन केंद्र स्थापित कर रही हैं।”

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