दुनिया में जारी उथल-पुथल के बीच भारत ने केंद्रीय बजट 2026 में अपनी विदेशी विकास सहायता में भी बड़े बदलाव किए हैं। एक तरफ, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के देखते हुए पहली बार चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया है। दूसरी तरफ, बांग्लादेश के साथ रिश्तों में खटास आने के बाद उसके भी अनुदान में कमी की गई है। हालांकि, इस बीच भूटान को सबसे अधिक मदद जारी है।
बांग्लादेश की मदद को झटका
भारत ने बांग्लादेश को 2024-25 में 59.15 करोड़ रुपये का अनुदान दिया था। वर्ष 2025-26 में अनुमानित अनुदान को बढ़ाकर 120 करोड़ रुपये कर दिया गया। इस बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट, भारत के खिलाफ बयानबाजी और अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों से दोनों देशों के रिश्तों में खटास पैदा हुई। तब सरकार ने आवंटित 120 करोड़ रुपये में केवल 34 करोड़ रुपये खर्च किए। इस वित्तीय वर्ष में बजट 60 करोड़ कर दिया गया है।
अमेरिका-ईरान तनाव का असर चाबहार बंदरगाह परियोजना पर
भारत ने चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए 2024-25 में 400 करोड़ रुपये का आवंटन किया था। इसके बाद 2025-26 में 100 करोड़ रुपये आवंटित किए, जिसे बाद में संशोधित अनुमानों में बढ़ाकर 400 करोड़ रुपये कर दिया गया था। इस वित्तीय वर्ष 2026-27 में चाबहार बंदरगाह परियोजना में आवंटन को शून्य कर दिया गया है। यह तब है, जब भारत ने 2024 में चाबहार में शाहिद बेहेश्टी टर्मिनल के संचालन के लिए 10 साल के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
इन पड़ोसी देशों पर भारत मेहरबान
भारत ने तालिबान शासन वाले अफगानिस्तान में अनुदान को 2024-25 में 42.43 करोड़ रुपये से बढ़ाकर इस बार 150 करोड़ रुपये किया है। भूटान को सबसे अधिक 1,768 करोड़ रुपये का अनुदान और 519 करोड़ रुपये के कर्ज के साथ 2,288 करोड़ रुपये आवंटित किया है। नेपाल को 800 करोड़, श्रीलंका को 400 करोड़, मालदीव को 550 करोड़ और अफ्रीकी देशों को 225 करोड़ रुपये आवंटित किया है। नेपाल की मदद स्थिर है, जबकि श्रीलंका की आर्थिक मदद बढ़ी है।
चाबहार बंदरगाह के लिए आवंटन न करने के क्या मायने हैं?
भारत द्वारा पहली बार चाबहार बंदरगाह के लिए कोई आवंटन न करना ईरान पर अमेरिका द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों के मद्देनजर सतर्कता दिखाता है। बता दें, भारत-ईरान द्वारा संयुक्त रूप से विकसित चाबहार बंदरगाह का उद्देश्य क्षेत्रीय संपर्क और व्यापार को मजबूत करना है। दोनों देश इसे अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) यानी भारत, ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के बीच माल-ढुलाई के लिए 7,200 किलोमीटर लंबी बहु-तरीका परिवहन परियोजना में शामिल करना चाहते हैं।
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