रायपुर। भारतीय प्रवासी दिवस पर शंकर नगर स्थित विधानसभा अध्यक्ष निवास में विमोचन व सम्मान समारोह आयोजित किया गया. इसमें प्रवासी भारतीयों पर लिखी दो पुस्तकों का विमोचन और 10 प्रवासियों का सम्मान किया गया. विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, साहित्य अकादमी अध्यक्ष शशांक शर्मा की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में प्रवासी छत्तीसगढ़ी के इतिहास और वर्तमान स्थिति पर चर्चा हुई.

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प्रवासी छत्तीसगढ़िया बंधुत्व मंच द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में दौरान रोजी-रोटी की तलाश में असम पहुंचे छत्तीसगढ़ के लोगों की चर्चा हुई, कि किस तरह से उन्होंने अपनी परंपरा-संस्कृति को सहेजे हैं.

गर्व है छत्तीसगढ़िया देश में नहीं विदेश में बना रहे बड़ा नाम – रमन सिंह

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि हमें गर्व है कि आज छत्तीसगढ़ की धरती से निकलकर छत्तीसगढ़िया देश ही नहीं देश के बाहर भी बड़ा नाम बना रहे हैं. मैंने अपनी विदेश यात्राओं के दौरान इसे बखूबी देखा भी है. लेकिन जो काम अशोक तिवारी और उनकी संस्था कर रही है, वह बड़ा काम है. सैकड़ों साल पहले अलग-अलग देशों में जाकर बस छत्तीसगढ़ियों का डेटा तैयार करना, उन्हें जोड़ना और इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करना. मैं इसके लिए उन्हें बहुत बधाई देता हूँ. मैं यह भी कहता हूँ, इसमें जो भी मदद की आवश्यकता है, वो मैं करूंगा.

मेरे पूर्वज भी काम की तलाश में गए बाहर- चरण दास महंत

कार्यक्रम में मौजूद पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने बताया कि मेरे पूर्वज भी छत्तीसगढ़ के बाहर काम की तलाश में गए थे. मेरे परदादा तो असम गए और वहीं बस गए थे. बाद में दादा भी गए और वहीं के होके रह गए. हालांकि, वे असम में कहाँ रहे और बाद कि स्थिति क्या रही इसकी जानकारी नहीं है. ऐसे ही लाखों लोग छत्तीसगढ़ से निकलकर आज देश के कई राज्यों और दूसरे देशों में भी हैं.

अमेरिका में मिले जांजगीर क्षेत्र के लोग

अमेरिका सहित कुछ अन्य देशों की यात्रा में जब गया तो मुझे छत्तीसगढ़ के अपने लोग मिले. अमेरिका में मेरे अपने जांजगीर क्षेत्र के लोग मिले. वास्तव में अशोक तिवारी इस दिशा में जो कार्य कर रहे हैं वह बहुत ही सराहनीय है. सरकार को इस पर काम करने की जरूरत है. मैं भी अपनी ओर से पूरी मदद करूंगा. हमें इस पर अभी व्यापक शोध की जरूरत है.

8 सालों से प्रवासी छत्तीसगढ़ियों के बीच जा रहे अशोक तिवारी

मंच के अध्यक्ष अशोक तिवारी पिछले 8 साल से असम में प्रवासी छत्तीसगढ़ी लोगों के बीच जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ से प्रवासन का इतिहास लगभग 150 वर्ष पुराना है. ब्रिटिश शासन के दौरान बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़िया लोग चाय बागानों में काम करने ले जाए गए. असम में रहने वाली सातवीं-आठवीं पीढ़ी आज भी छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को संजोए हुए है. वहां वे अपने विविध त्योहारों का आयोजन भी करते हैं.

उन्होंने कहा कि अब छत्तीसगढ़ से बाहर जाने वाले लोग केवल मजदूर नहीं हैं. पढ़े-लिखे और दक्ष युवा अमेरिका, यूरोप और एशिया में तकनीक, शिक्षा और उद्योग के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. 2017 के बाद से छत्तीसगढ़ में प्रवासी समाज को संगठित रूप से समझने और जोड़ने की शुरुआत हुई, जो अब एक सतत प्रक्रिया बन चुकी है. यह आयोजन प्रवासी नागरिकों से जोड़ने का माध्यम बना है.

प्रवासी मित्र सम्मान से किया गया सम्मानित

छत्तीसगढ़िया आज देश के विभिन्न राज्यों में ही नहीं, बल्कि अमेरिका, यूरोप, चीन, ब्रिटेन, अर्जेन्टीना जैसे अनेक देशों में बस गए हैं. प्रवासी छत्तीसगढ़ियां वहां अपनी भूमिका चिकित्सा, शिक्षा, राजनीति, उद्योग-व्यापार में बखूबी निभा रहे हैं. यही नहीं वे वहां के संस्कृति को शिरोधार्य करने के साथ-साथ अपनी छत्तीसगढ़ियां संस्कृति को भी सहेजे हुए हैं.

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की संस्कृति को सहेज कर रखने वाले अमेरिका के हर नारायण शुक्ला, असम के रोहित साहू, रूपा सिंह, मिलन सतनामी व कृष्णा साहू, झारखंड के पुरंदर सिंह व भरत वर्मा, अर्जेंटीना के राउल ऋषि वर्मा, महाराष्ट्र के विवेक सारखा का सम्मान किया गया.