ईरान-इजराइल जंग अगर बढ़ी तो भारत में रसोई गैस की किल्लत भी बढ़ सकती है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने इमरजेंसी पावर का यूज करते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन में रुकावट की वजह से गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने गुरुवार देर रात आदेश जारी किया। इस आदेश में कहा गया है कि अब रिफाइनरी कंपनियां अपने पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी। यानी इन गैसों का उपयोग किसी और काम में नहीं किया जाएगा।

होर्मुज रूट के भरोसे नहीं, हमारे पास पर्याप्त स्टॉक

सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने कहा कि हमारे पास ऊर्जा के इतने सोर्स हैं कि हम सिर्फ होर्मुज रूट के भरोसे नहीं हैं। कच्चे तेल, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और LPG के मामले में हम काफी अच्छी स्थिति में हैं। हमारे पास अभी पर्याप्त स्टॉक है, चिंता की बात नहीं है। हम दुनिया के दूसरे हिस्सों से सप्लाई बढ़ा रहे हैं ताकि होर्मुज के रास्ते होने वाली सप्लाई की कमी को पूरा किया जा सके।

हम 2022 से रूस से कच्चा तेल खरीद रहे हैं। 2022 में हम अपनी जरूरत का सिर्फ 0.2% तेल रूस से मंगाते थे। वहीं इस साल फरवरी में हमारी कुल जरूरत का 20% हिस्सा रूस से आया है। फरवरी में भारत ने रूस से हर दिन 10.4 लाख बैरल कच्चा तेल इम्पोर्ट किया है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG इम्पोर्टर देश है। MRPL रिफाइनरी बंद होने की खबरें गलत हैं। रिफाइनरी के पास तेल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

सरकारी कंपनियों को मिलेगी प्राथमिकता

आदेश के मुताबिक, सभी कंपनियों को प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) को करनी होगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश के लगभग 33.2 करोड़ एक्टिव LPG कंज्यूमर्स यानी उपभोक्ताओं को बिना किसी रुकावट के गैस सिलेंडर मिलते रहें।

रिलायंस के एक्सपोर्ट और पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन पर असर

सरकार के इस फैसले का सीधा असर प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों, खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) पर पड़ सकता है। प्रोपेन और ब्यूटेन का डायवर्जन होने से अल्काइलेट्स के प्रोडक्शन में कमी आएगी, जिसका इस्तेमाल पेट्रोल की ग्रेडिंग सुधारने में किया जाता है। पिछले साल रिलायंस ने हर महीने एवरेज चार अल्काइलेट्स कार्गो एक्सपोर्ट किए थे। इसके अलावा सरकार ने रिफाइनर्स को यह भी साफ कर दिया है कि वे फिलहाल पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन के लिए इन गैसों का इस्तेमाल न करें।

कंपनियों का मुनाफा कम हो सकता है

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और ट्रेड सोर्सेज का कहना है कि प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल के बजाय LPG बनाने में इस्तेमाल करने से कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ेगा। दरअसल, पॉलीप्रोपाइलीन और अल्काइलेट्स जैसे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स बाजार में LPG के मुकाबले बेहतर कीमत पर बिकते हैं। ऐसे में सरकार के इस आदेश से पेट्रोकेमिकल कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

कतर में गैस उत्पादन बंद, भारत में 40% सप्लाई घटी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिडिल-ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण भारत में CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) और PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। ईरान के ड्रोन हमले के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश कतर अपने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) प्लांट का प्रोडक्शन रोक चुका है। इससे भारत आने वाले जहाजों की आवाजाही रुक गई है और घरेलू बाजार में गैस की सप्लाई में 40% तक की बड़ी कटौती की गई है। भारत अपनी जरूरत की 40% LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) यानी करीब 2.7 करोड़ टन सालाना कतर से ही आयात करता है। विदेश से आने वाली LNG को गैस में बदलकर ही CNG और PNG सप्लाई की जाती है। इसकी सप्लाई रुकने से सिटी गैस कंपनियों (CGD) ने चेतावनी दी है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो CNG और PNG के दाम बढ़ सकते हैं।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m