भारतीय नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव के बीच भारतीय ईंधन और एलपीजी टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अरब सागर और ओमान की खाड़ी में अतिरिक्त युद्धपोत तैनात किए हैं। जानकारी के अनुसार, सूत्रों ने बताया कि भारतीय नौसेना ने आधे दर्जन से अधिक युद्धपोतों को, जिनमें रसद जहाज भी शामिल हैं, एहतियाती तौर पर इस क्षेत्र में भेजा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी समुद्री सुरक्षा और एनर्जी सप्लाई को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. यह फैसला इस इलाके में एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर बढ़ते खतरे के मद्देनजर लिया गया है.

मध्य पूर्व तनाव के बीच, भारतीय नौसेना ने ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के लिए ओमान की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में अपने युद्धपोतों की संख्या बढ़ाई है. इसका मकसद भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करना है.

नौसेना का मुख्य मकसद भारतीय झंडे वाले टैंकरों और जहाजों को सुरक्षित भारत तक पहुंचाना है. सुरक्षा के इसी घेरे में INS शिवालिक, आईएनएस सुनयना और जग लाडकी सुरक्षित भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुके हैं.

2019 से मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट के तहत इस क्षेत्र में आमतौर पर 1 से 3 युद्धपोत तैनात रहते थे, लेकिन अब इनकी संख्या पहले से ज्यादा कर दी गई है. तैनात युद्धपोतों का मुख्य काम भारतीय जहाजों को खतरनाक इलाकों से सुरक्षित निकालना है. फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिम में 22 भारतीय जहाज मौजूद हैं, जिन पर नौसेना की पैनी नजर है.

हाल के दिनों में भारत ने पहले ही दो सरकारी स्वामित्व वाले एलपीजी टैंकरों—शिवालिक और नंदा देवी—के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया है, जो सफलतापूर्वक जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। नई दिल्ली तेहरान के साथ बातचीत जारी रखे हुए है ताकि अधिक जहाजों की आवाजाही सुगम हो सके।

भारतीय नौसेना की यह तैनाती ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत चल रही है, जो 2019 से खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए सक्रिय है। सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में कई भारतीय जहाज—जिनमें 22 से अधिक भारत-बाउंड वेसल शामिल हैं—क्षेत्र में फंसे हुए हैं या सुरक्षित निकासी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। नौसेना के युद्धपोत इनकी निगरानी और एस्कॉर्ट कर रहे हैं।

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