कनाडा में भारतीय मूल के युवक दिलराज सिंह गिल की हत्या कर दी गई है। पुलिस ने बताया कि यह हत्या टारगेटेड गैंग वॉर का नतीजा हो सकती है। पुलिस ने बताया कि गिल पुलिस के लिए जाना-पहचाना था।

कनाडा में इस युवक की हत्या गुरुवार, 22 जनवरी को हो गई थी। पुलिस ने शनिवार, 24 जनवरी को इस युवक की पहचान वैंकूवर निवासी दिलराज सिंह गिल के रूप में बताई, जो कि भारतीय मूल का निवासी था। इंटीग्रेटेड होमिसाइड इन्वेस्टिगेशन टीम (IHIT) ने अपने बयान में कहा कि शुरुआती जांच से यह एक सोची-समझी, निशाना बनाकर की गई हत्या लगती है।

IIHT ने कहा कि इसके तार बीसी (ब्रिटिश कोलंबिया) में सक्रिय गैंग वॉर से जुड़े हो सकते हैं. एजेंसी के मुताबिक, रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) की बर्नाबी यूनिट को 22 जनवरी 2026 को शाम करीब 5:30 बजे से ठीक पहले गोली चलने की सूचना मिली थी. यह जगह कनाडा वे के 3700 ब्लॉक के पास है. जब पुलिस मौके पर पहुंची तो एक व्यक्ति को गंभीर हालत में गोली लगने से घायल पाया गया.

उसे बचाने की कोशिश की गई, लेकिन बाद में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. उसकी पहचान दिलराज सिंह गिल के रूप में हुई. बयान में आगे कहा गया कि इसके तुरंत बाद, अधिकारियों ने बक्सटन स्ट्रीट के 5000 ब्लॉक में एक गाड़ी आग की लपटों में घिरी हुई मिली. जांचकर्ताओं ने यह पता लगा रही है कि क्या इस गाड़ी का गोलीबारी की घटना से कोई संबंध है.

जांचकर्ताओं का मानना है कि इसी वाहन का इस्तेमाल हमलावरों ने किया और सबूत मिटाने के लिए उसे आग लगा दी. पुलिस का कहना है कि वारदात के बाद गाड़ी जलाना संगठित गैंग हिंसा में अक्सर अपनाई जाने वाली तरकीब है. जांचकर्ता अब घटनास्थल के आसपास मौजूद गवाहों या डैशकैम रिकॉर्डिंग की तलाश कर रहे हैं, ताकि संदिग्धों की पहचान की जा सके.

इसी महीने हुई हत्या से जुड़ा हो सकता है मामला!

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिल की हत्या का संबंध इसी महीने एबट्सफोर्ड में मारे गए एक अन्य 28 वर्षीय इंडो-कैनेडियन नवप्रीत धालीवाल से जुड़ सकता है. धालीवाल पर ब्रदर्स कीपर्स गैंग से जुड़े होने का शक था, जिसे यूएन गैंग का विरोधी माना जाता है. गिल के बारे में कहा जा रहा है कि वह कथित (Alleged) तौर पर यूएन गैंग से जुड़ा हुआ था.

वैंकूवर सन की रिपोर्ट के अनुसार, गिल का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है. उस पर 2021 में ड्रग्स से जुड़े आरोप लगे थे और 2016 से जुड़े कुछ अन्य मामलों में भी उसका नाम सामने आया था. धालीवाल भी पुलिस के लिए नया नाम नहीं था और उसका भी आपराधिक इतिहास था. बताया गया है कि जब उसकी हत्या हुई, तब वह जमानत पर बाहर था.

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