मुंबई। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट की आशंका को फिर से जगा दिया है। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है, ऐसे समय में भारत से एक बड़ी उम्मीद सामने आई है। मुंबई स्थित Institute of Chemical Technology (ICT) के वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीकें विकसित करने का दावा किया है जो भविष्य में दुनिया को तेल-गैस के संकट से बचा सकती हैं।
ऊर्जा संकट का हल बताने का दावा
ICT मुंबई, जिसे पहले UDCT के नाम से जाना जाता था, देश के सबसे प्रतिष्ठित केमिकल इंजीनियरिंग संस्थानों में गिना जाता है। यहां से निकले कई वैज्ञानिक और उद्योगपति देश-दुनिया में बड़ा नाम कमा चुके हैं। अब इसी संस्थान के शोध फिर चर्चा में हैं क्योंकि यह शोध सीधे-सीधे ऊर्जा संकट का हल बताने का दावा कर रहे हैं।
ICT के पूर्व कुलपति डॉ. गणपति डी. यादव
इस पूरे शोध कार्य का नेतृत्व कर रहे प्रोफेसर डॉ. गणपति डी. यादव, जो ICT के पूर्व कुलपति रह चुके हैं और देश के बड़े वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं। पद्मश्री से सम्मानित डॉ. यादव के नाम 100 से ज्यादा पेटेंट दर्ज हैं और उन्होंने कई ऐसी तकनीकों पर काम किया है जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को बदल सकती हैं।
पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता काफी कम
डॉ. यादव और उनकी टीम पिछले कई सालों से ग्रीन हाइड्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड से ईंधन बनाने, बायो-अल्कोहल से ऊर्जा तैयार करने और प्लास्टिक कचरे को फिर से उपयोगी बनाने जैसी तकनीकों पर काम कर रही है। वैज्ञानिकों का दावा है कि अगर इन तकनीकों को बड़े स्तर पर लागू किया जाए तो पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता काफी कम हो सकती है।
परीक्षण अब पायलट स्तर पर
ONGC एनर्जी सेंटर के सहयोग से ICT की टीम ने ऐसी प्रक्रिया विकसित की है जिससे कार्बन डाइऑक्साइड को मीथेन, मेथनॉल और दूसरे हाइड्रोकार्बन में बदला जा सकता है। यही नहीं, पानी से ग्रीन हाइड्रोजन बनाने की तकनीक भी तैयार की गई है, जिसका परीक्षण अब पायलट स्तर पर किया जा रहा है।
एक और बड़ी उपलब्धि के तौर पर वैज्ञानिकों ने कार्बन डाइऑक्साइड से सीधे डाइमेथाइल ईथर (DME) बनाने की तकनीक तैयार की है। यह ऐसा साफ ईंधन है जिसे LPG में मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर यह तकनीक सफल होती है तो गैस सिलेंडर की लागत कम करने से लेकर आयात पर निर्भरता घटाने तक बड़ा असर पड़ सकता है।
नासिक स्थित गोदावरी बायोरिफाइनरी
इस तकनीक को अब नासिक स्थित गोदावरी बायोरिफाइनरी के साथ मिलकर बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी चल रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत को एक ही ईंधन पर निर्भर रहने की बजाय कई तरह की ऊर्जा तकनीकों का इस्तेमाल करना होगा, तभी भविष्य के संकट से बचा जा सकेगा। डॉ. यादव ने प्लास्टिक कचरे को लेकर भी नया सुझाव दिया है। उनका कहना है कि प्लास्टिक पर सिर्फ प्रतिबंध लगाने से समस्या खत्म नहीं होगी। हर प्लास्टिक सामान पर 20 रुपये की रिफंड राशि तय कर दी जाए और डिजिटल ट्रैकिंग शुरू की जाए तो कचरा अपने आप वापस आएगा और रीसाइक्लिंग बढ़ेगी।
रास्ता विज्ञान और नई सोच ही दे सकती
उन्होंने यह भी कहा कि कृषि अवशेष से बायो-रिफाइनरी बनाकर किसान की आय बढ़ाई जा सकती है और यही भविष्य की असली ऊर्जा होगी।डॉ. यादव का कहना है कि दुनिया जिस ऊर्जा संकट की तरफ बढ़ रही है, उससे निकलने का रास्ता विज्ञान और नई सोच ही दे सकती है। उनके शब्दों में -भारत का समय आ चुका है, कचरा भी संपत्ति है, जरूरत सिर्फ सोच बदलने की है।
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