अमेरिका से हो रही ट्रेड डील के बीच कई बार डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। भारत अभी तक ऐसे सवालों के जवाब देने में बच रहा था लेकिन अब विदेश सचिव ने इस सवाल पर रूख साफ कर दिया है। विदेश सचिव ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत राष्ट्रीय हितों के आधार पर ऊर्जा खरीद के लिए स्रोत तय करेगा।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एक पत्रकार से सवाल पर जवाब दे रहे थे, उन्होंने कहा कि वास्तव में तेल कंपनियां फैसला करती हैं कि कहां से तेल खरीद करनी है और यह फैसला मुख्य रूप से बाजार के हाव-भाव पर डिपेंड होते हैं यानी बाजार की स्थितियों पर आधारित होते हैं। भारत वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाता है।
भारत रूस से तेल खरीदेगा?
विदेश सचिव विक्रम मिस्री से सवाल किया गया अमेरिका के दावे के मुताबिक क्या भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा, इस सवाल पर ने उन्होंने कहा कि देश इसके लिए किसी एक सोर्स पर निर्भर नहीं है, और न ही ऐसा करने का इरादा है।
उन्होंने कहा, “आप जानते हैं कि भारत तेल और गैस सेक्टर में नेट इंपोर्टर है। हम एक डेवलपिंग इकोनॉमी हैं; हमें अपने रिसोर्स की उपलब्धता के बारे में जागरूक रहना होगा। स्वाभाविक रूप से, जब आप 80-85% तक इंपोर्टेड रिसोर्स पर निर्भर होते हैं, तो आपको ऊर्जा की लागत से होने वाली महंगाई की संभावना के बारे में चिंता होगी। इसलिए, यह कोई हैरानी की बात नहीं है कि हमारी सबसे पहली प्राथमिकता भारतीय कंज्यूमर्स के हितों की रक्षा करना है, जहां तक ऊर्जा की बात है यह पक्का करना कि उन्हें सही कीमत पर और भरोसेमंद और सुरक्षित सप्लाई के ज़रिए पर्याप्त ऊर्जा मिले और ऊर्जा के मामले में हमारी इंपोर्ट पॉलिसी पूरी तरह से इन्हीं उद्देश्यों से तय होती है।”
आगे उन्होंने कहा, “अब, आपने यह भी देखा होगा कि हाल के सालों में, ग्लोबल इकोनॉमी ने काफी अनिश्चितताओं का सामना किया है, जिसका ग्लोबल एनर्जी मार्केट की स्थिरता पर बड़ा असर पड़ा है। हम इसके लिए किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं हैं, और न ही हम ऐसा करना चाहते हैं। और यह स्वाभाविक है कि स्रोत समय-समय पर बदलता रहता है, जो मार्केट की स्थितियों पर निर्भर करता है। हमारा तरीका सप्लाई के कई स्रोत बनाए रखना और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उन्हें जरूरत के मुताबिक डाइवर्सिफाई करना है। इसलिए, मैं कहूंगा कि हम इस क्षेत्र में जितने ज़्यादा डाइवर्सिफाइड होंगे, उतने ही ज़्यादा सुरक्षित होंगे।”
आगे कहा, “जहां तक ऊर्जा की असल स्रोतों की बात है फिर से, आप सभी इसे करीब से फॉलो करते हैं, इसलिए आप जानते हैं कि असल स्रोत तेल कंपनियों तय की जाती है, यह पब्लिक सेक्टर की तेल कंपनियां, प्राइवेट सेक्टर की तेल कंपनियां और वे मार्केट की स्थितियों के आधार पर फैसले लेती हैं। वे किसी भी समय उपलब्धता का आकलन करती हैं, वे जोखिमों का आकलन करती हैं, वे इस प्रक्रिया में लागत का आकलन करती हैं। और जाहिर है, इन सभी कंपनियों के पास भी अपनी आंतरिक जवाबदेही से संबंधित प्रक्रियाएं होती हैं और मार्केट में कुछ भरोसेमंद ज़िम्मेदारियां होती हैं।”
कई स्रोत बनाना भारत की रणनीति
भारत द्वारा कच्चे तेल की खरीद के सवाल पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा ऊर्जा खरीद के लिए कई स्रोतों (देशों) को बनाए रखना हमारी रणनीति रही है। भारत और आसपास के कई अन्य देशों की यह साझा रुचि है कि ऊर्जा की कीमतें स्थिर रहें और सभी देशों को ऊर्जा की सुरक्षित व भरोसेमंद आपूर्ति हो। आगे विदेश सचिव ने रुख साफ करते हुए कहा, “भारत राष्ट्रीय हितों के आधार पर ऊर्जा खरीद के लिए स्रोत तय करेगा।”
ट्रंप कई बार कर चुके हैं दावा
दो फरवरी को अपने एक सोशल ट्रुथ पोस्ट में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की और दोनों नेता एक ट्रेड डील पर सहमत हो गए हैं, जिसके तहत अमेरिका भारत पर लगने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 25 से 18 कर देगा। साथ ही ट्रंप ने यह भी दावा किया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे वादा किया है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा और अमेरिका और वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदेगा।
साथ ही यह दावा किया प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी एनर्जी, टेक्नोलॉजी, कृषि और कोयले में 500 अरब डॉलर से अधिक निवेश के अलावा, अधिक संख्या में अमेरिकी प्रोडक्ट खरीदने के प्रति प्रतिबद्धता जताई है। शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव आदेश पर साइन भी किए, जिसके तहत अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीदने पर लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ को खत्म कर दिया। एग्जिक्यूटिव आदेश के दौरान ट्रंप ने फिर अपने दावे को दोहराया कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा।
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