हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में व्यवस्थाओं की पोल एक बार फिर खुल गई है। पहले चूहों की शिकायतें सामने आई थीं और अब अस्पताल के भीतर बिल्लियों का आतंक दिखाई दे रहा है। यह हाल तब है जब यहां रोज़ाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। बाह्य रोगी विभाग, आपात कक्ष, शल्य कक्ष के आसपास और भोजनालय तक में बिल्लियां बेखौफ घूमती नजर आ रही हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मानव प्रतिरक्षा वायरस से संक्रमित मरीजों के संवेदनशील वार्ड में भी बिल्लियों की आवाजाही देखी गई है। ऐसे वार्ड में साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव के सख्त इंतजाम होने चाहिए, लेकिन हालात उलटे नजर आ रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि कई बार दवाइयों के पत्ते फटे हुए मिले हैं। कुछ मामलों में जांच के लिए रखे गए नमूनों से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई जा रही है। यदि यह सच है तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है।
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अस्पताल के भोजनालय और बाह्य रोगी विभाग के वीडियो सामने आए हैं, जिनमें बिल्लियां खुलेआम घूमती दिखाई दे रही हैं। सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के बजट वाले इस बड़े सरकारी अस्पताल में स्वच्छता और निगरानी की व्यवस्था आखिर कहां है? इलाज के नाम पर भरोसा लेकर आने वाले मरीजों को यदि जानवरों के बीच उपचार लेना पड़े, तो यह व्यवस्था पर सीधा प्रश्नचिह्न है। अब देखना होगा कि अस्पताल प्रशासन केवल सफाई का दावा करता है या फिर जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई भी करता है। इंदौर जैसे शहर में इस तरह की लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती।
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