चंकी बाजपेयी, इंदौर। इंदौर की बेटी सपना शर्मा ने जहां चाह है वहां रात है’ कहावत को चरितार्थ कर दिया है। बेंगलुरु के कोरमंगला स्टेडियम में आयोजित प्रतियोगिता में पैरा ताइक्वांडो में गोल्ड मेडल हासिल करने वाली देश की पहली दिव्यांग खिलाड़ी बन गई हैं। इस हौसले की उड़ान ने इंदौर ही नहीं बल्कि पूरे मध्य प्रदेश और पूरे देश का नाम रोशन कर दिया है।

तेलंगाना की 2 खिलाडियों को मिला रजत और कांस्य पदक

दरअसल, 28-29 मार्च को बेंगलुरु कोरमंगला स्टेडियम नेशनल पैरा ताइक्वांडो खेला गया था। जिसमें देश के 70 दिव्यांग खिलाड़ी शामिल हुए थे। फाइनल मुकाबले में 33 वर्षीय सपना शर्मा ने बेहतर प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल हासिल कर लिया। उनके साथ तेलंगाना की ममता को रजत पदक और कृष्णा देवी को कांस्य पदक मिला है। इस मुकाबले में सपना शुरू से ही बेहतर प्रदर्शन कर रही थी।

पैरों में पोलियो, फिर भी नहीं मानी हार

बता दें कि सपना के दोनों पैरों में पोलियो है लेकिन इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और टेबल टेनिस में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने के बाद आर्म रेसलिंग में भी पदक जीता है। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ यह मुकाम हासिल किया है जिस वजह से आज वह और ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई हैं। 

खुद को मानती हैं रोल मॉडल

उनका कहना है कि वह सभी खिलाड़ियों को रोल मॉडल मानती हैं। लेकिन सबसे ज्यादा वह खुद को अपने रोल मॉडल के रूप में पाती हैं क्योंकि आज इतने संघर्षों के बावजूद भी वह लगातार अपने और देश के लिए खेल रही हैं और कई कोशिशों के बाद यहां तक पहुंची हैं। 

कगतार चौथा नेशनल गोल्ड मेडल किया हासिल

शुरुआती दौर में उनके जीवन में काफी उतार-चढ़ाव आए लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार सारी जिम्मेदारियां उठाते हुए खेल के प्रति सजग रही। उसी का नतीजा है कि आज उन्हें गोल्ड मेडल मिला है। यह उनका लगातार चौथा नेशनल गोल्ड मेडल है।

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