Infosys Profit Down Update: आईटी कंपनी इंफोसिस ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं. कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 2.2 प्रतिशत घटकर 6,654 करोड़ रुपये रह गया है. पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा 6,806 करोड़ रुपये था.
वहीं, ऑपरेशंस से होने वाला रेवेन्यू करीब 9 प्रतिशत बढ़कर 45,479 करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले साल इसी अवधि में 41,764 करोड़ रुपये था. मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ को देखते हुए इंफोसिस ने पूरे वित्त वर्ष के लिए रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस को 2-3 प्रतिशत से बढ़ाकर 3-3.5 प्रतिशत कर दिया है.
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नए लेबर कोड बने मुनाफा घटने की वजह
इंफोसिस के मुनाफे में गिरावट की मुख्य वजह भारत में लागू किए गए नए लेबर कोड हैं. कंपनी के मुताबिक, नए नियमों के चलते उसे ग्रेच्युटी देनदारी और छुट्टी के बदले भुगतान के लिए 1,289 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान करना पड़ा है. यह एक बार का खर्च यानी वन-टाइम कॉस्ट है.
नए लेबर कोड 21 नवंबर से लागू हुए हैं, जिनके तहत कंपनियों को अपने सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव करना पड़ा है. अब बेसिक सैलरी को CTC यानी कॉस्ट टू कंपनी का कम से कम 50 प्रतिशत रखना अनिवार्य हो गया है.
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कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर घटी
आईटी सेक्टर के लिए एट्रिशन रेट यानी कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर एक बड़ी चुनौती मानी जाती है. इंफोसिस का एट्रिशन रेट पिछले साल के 13.7 प्रतिशत से घटकर 12.3 प्रतिशत रह गया है. तिमाही आधार पर इसमें करीब 2 प्रतिशत की कमी आई है. इसका मतलब है कि कंपनी अब अपने कर्मचारियों को बेहतर तरीके से बनाए रखने में सफल हो रही है.
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CEO बोले- AI पार्टनर के रूप में उभरी इंफोसिस
नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए इंफोसिस के CEO और MD सलिल पारेख ने कहा कि तीसरी तिमाही का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है. उन्होंने बताया कि कंपनी के एंटरप्राइज AI प्लेटफॉर्म ‘इंफोसिस टोपाज़’ की वजह से मार्केट शेयर में बढ़ोतरी हो रही है.
सलिल पारेख ने कहा कि क्लाइंट्स अब इंफोसिस को एक भरोसेमंद AI पार्टनर के तौर पर देख रहे हैं. AI में कंपनी की विशेषज्ञता और नए इनोवेशन से बिजनेस वैल्यू बढ़ाने में मदद मिली है.
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इंफोसिस के शेयर रहे मजबूती में
नतीजे जारी होने से पहले इंफोसिस के शेयर 0.62 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,608.90 रुपये पर बंद हुए. निवेशकों को कंपनी के रेवेन्यू गाइडेंस बढ़ने की उम्मीद पहले से थी.
रेवेन्यू गाइडेंस क्या होता है?
आईटी कंपनियां हर तिमाही में यह अनुमान लगाती हैं कि पूरे साल उनकी कमाई में कितनी बढ़ोतरी हो सकती है. इसे रेवेन्यू गाइडेंस कहा जाता है. इंफोसिस ने अपना गाइडेंस बढ़ाकर 3.5 प्रतिशत कर दिया है, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में कंपनी को ज्यादा नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद है.
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