अजयारविंद नामदेव, शहडोल। शहडोल जिले का छोटा सा गांव बिचारपुर, जिसे देश आज मिनी ब्राज़ील के नाम से जानता है, एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मानचित्र पर चमक उठा है। जर्मनी के बाद अब कंबोडिया के राष्ट्रीय फुटबॉल कोच चार्ली पॉमरोय का यहां पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि गांव की मिट्टी में अब विश्व स्तर का खेल भविष्य आकार ले रहा है।

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फुटबॉल की दुनिया में तेजी से अपनी पहचान बना चुका शहडोल जिले का ग्राम बिचारपुर, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिनी ब्राज़ील के नाम से सम्मानित किया है, एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। जर्मनी के प्रतिष्ठित क्लब FC Ingolstadt 04 के कोच डाइटमार बीयर्सडॉर्फ के दौरे के बाद अब कंबोडिया के राष्ट्रीय फुटबॉल कोच चार्ली पॉमरोय ने मिनी ब्राज़ील के खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनके खेल और जज़्बे की सराहना की। 

मूल रूप से यूनाइटेड किंगडम (इंग्लैंड) के रहने वाले चार्ली पॉमरोय वर्तमान में कंबोडिया और नौरू की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के कोच हैं। उन्हें बिचारपुर की फुटबॉल यात्रा और संघर्ष की कहानी सोशल मीडिया के माध्यम से पता चली, जिसने उन्हें इतना प्रभावित किया कि वे स्वयं खिलाड़ियों से मिलने शहडोल पहुंचे, बिचारपुर पहुंचने पर जिला फुटबॉल संघ के पदाधिकारियों और स्थानीय कोचों ने अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया,  गांव के फुटबॉल कोच रईस अहमद ने बिचारपुर के उस सफर को साझा किया, जब यह क्षेत्र कभी नशे की पहचान से जुड़ा था और आज अनुशासन व खेल संस्कृति के लिए जाना जाता है। चार्ली पॉमरोय ने खिलाड़ियों और कोचों से संवाद कर उनकी चुनौतियों को समझा, खिलाड़ियों ने मैदान, संसाधन, आधुनिक प्रशिक्षण और एक्सपोज़र की कमी जैसे मुद्दे रखे, इस पर पॉमरोय ने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि दुनिया के कई महान खिलाड़ी सीमित संसाधनों में ही निखरकर सामने आए हैं। उन्होंने उपलब्ध संसाधनों में निरंतर अभ्यास, अनुशासन और संरचित प्रशिक्षण पर जोर दिया तथा स्किल और टेक्निक डेवलपमेंट के लिए सिलेबस आधारित प्रशिक्षण अपनाने का सुझाव दिया। 

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पीएम नरेंद्र मोदी के पॉडकास्ट में चर्चा के बाद शहडोल का बिचारपुर देशभर में पहचान बना गया। कभी नशे के लिए बदनाम यह गांव आज मिनी ब्राज़ील के नाम से फुटबॉल का गढ़ बन चुका है, जहां से निकलती प्रतिभा अब अंतरराष्ट्रीय कोचों का भी ध्यान खींच रही है। मिनी ब्राज़ील बिचारपुर आज न केवल शहडोल बल्कि पूरे देश के लिए ग्रामीण प्रतिभा और खेल परिवर्तन की मिसाल बनता जा रहा है।

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