रायपुर। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने के मामले में राष्ट्रीय अऩुसूचित जनजाति आयोग ने जांच शुरु कर दी है और सरकार से जवाब तलब किया है. आयोग के अवर सचिव डीएस कुमारे ने मुख्य सचिव और डीजीपी को इस मामले में नोटिस जारी कर 15 दिन के अंदर जवाब मांगा है.

नोटिस में चेतावनी भी दी गई है कि यदि नियत अवधि में आयोग को उत्तर प्राप्त नहीं होता है तो वह भारत के संविधान द्वारा प्राप्त हुई शक्तियों का प्रयोग भी कर सकता है और उपस्थित होने के लिए समन भी जारी कर सकता है।

आयोग ने यह नोटिस नवल सिंह मंडावी के शिकायत के आधार पर जारी किया है. मंडावी ने आयोग को शिकायत की है कि छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा अनुसूचित जाति, जन-जाति एवं पिछड़ा वर्ग के अधिकारियों/कर्मचारियों को चिन्हित कर जबरदस्ती सेवानिवृत्ति दी गई है.

नवल सिंह मंडावी रिटायर्ड आईएएस हैं और वे छत्तीसगढ़  सर्व समाज के संयोजक एवं गोंडवाना गोंड महासभा के प्रदेश अध्यक्ष हैं.

गौरतलब है कि अभी दो दिन पहले पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने प्रेस कान्फ्रेंस लेकर अनिवार्य सेवानिवृत्ति के इस मामले को असंवैधानिक बताया था. एवं उन्होंने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के कर्मचारियो से उदारता बरतने के सम्बंध में कांग्रेस शासन काल के समय का एक परिपत्र प्रेस वार्ता में जारी किया था .