ईरान ने 19 साल के उभरते हुए इंटरनेशनल रेसलिंग स्टार सालेह मोहम्मदी को गुरुवार सुबह ईरान सरकार ने गुपचुप तरीके से फांसी पर लटका दिया है. सालेह पर जनवरी में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दो पुलिस अधिकारियों की हत्या का आरोप था. खबरों के मुताबिक, मोहम्मदी पर ‘ईश्वर के विरुद्ध शत्रुता’ (मोहारेबेह) का आरोप लगाया गया था और प्रदर्शनों में भाग लेने वाले दो अन्य लोगों – मेहदी गसेमी और सईद दाऊदी – के साथ उन्हें फाँसी दे दी गई. ईरान इंटरनेशनल के अनुसार, इन तीनों पर 8 जनवरी को पवित्र शहर क़ोम में हुए प्रदर्शनों के दौरान “दो पुलिस अधिकारियों पर चाकू और तलवार से हमला करने” का आरोप था. इस फांसी के बाद ईरान की जेलों में बंद अन्य एथलीटों की जान पर भी खतरा मंडराने लगा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी आक्रोश देखा जा रहा है.

मानवाधिकार संगठन ने पोस्ट किया मोहम्मदी की कुश्ती का वीडियो

मानवाधिकार संगठन हेंगाव ने मोहम्मदी की कुश्ती का वीडियो पोस्ट किया. हेंगाव ने X पर लिखा: “वीडियो में 19 वर्षीय एथलीट और ईरान की राष्ट्रीय कुश्ती टीम के सदस्य सालेह मोहम्मदी को दिखाया गया है, जिन्हें 19 मार्च, 2026 की सुबह क़ोम केंद्रीय जेल में ‘ईश्वर के विरुद्ध शत्रुता’ (मोहारेबेह) के आरोप में गुपचुप तरीके से फाँसी दे दी गई. मोहम्मदी ने पहले यह वीडियो अपने इंस्टाग्राम पेज पर साझा किया था, जिसमें उन्होंने अपने खेल के सफर और सफलता के प्रयासों को दर्शाया था.”

सालेह मोहम्मदी कौन थे?

2007 में जन्मे मोहम्मदी ने सितंबर 2024 में रूस के क्रास्नोयार्स्क में आयोजित सैतियेव अंतर्राष्ट्रीय कप में ईरान की राष्ट्रीय फ्रीस्टाइल कुश्ती टीम के लिए कांस्य पदक जीता था. अमेरिकी विदेश विभाग और ईरानी-अमेरिकी पहलवानों की चेतावनियों के बाद उन्हें फांसी दी गई. ईरान की धार्मिक सरकार, जिसने अपनी स्थापना के बाद से सबसे बड़ा विद्रोह देखा, ने दावा किया कि इन तीनों व्यक्तियों ने इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर से कार्रवाई की.

बता दें कि, ईरान में प्रतिबंधों के कारण बढ़ी महंगाई और जीवन यापन के संकट ने जनवरी में देश भर में लाखों प्रदर्शनकारियों को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया. इसके बाद हुई दमनकारी कार्रवाई में कम से कम 6,000 लोगों की मौत हुई, जबकि कुछ रिपोर्टों में मरने वालों की संख्या कम से कम 30,000 बताई गई.

ईरान देना चाहता है ये संदेश

ईरान में खिलाड़ी केवल खेल का मैदान ही नहीं संभालते, बल्कि वे युवाओं के लिए ‘आइकन’ होते हैं. जब कोई मशहूर खिलाड़ी सरकार के खिलाफ खड़ा होता है, तो उसका असर लाखों लोगों पर पड़ता है. सालेह मोहम्मदी की फांसी को इसी ‘असर’ को खत्म करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. इससे पहले भी ईरान ने मशहूर पहलवान नाविद अफकारी को फांसी देकर दुनिया को चौंका दिया था. शासन का संदेश साफ है- ‘चाहे आप कितने भी बड़े स्टार क्यों न हों, अगर आप व्यवस्था को चुनौती देंगे, तो अंजाम फांसी का फंदा होगा’.

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