ईरान की करेंसी रियाल के अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद ईरानी सरकार ने खाने-पीने के सामानों के इंपोर्ट पर दी जाने वाली सब्सिडी एक्सचेंज रेट को बंद कर दिया है. इस बीच भारत को ईरान के लिए प्रीमियम बासमती चावलों के एक्सपोर्ट में दिक्कतें आ रही हैं क्योंकि यहां की सरकार ने खाने-पीने के सामानों के आयात पर दी जाने वाली सब्सिडी को वापस ले लिया है. इसके चलते भारतीय एक्सपोटर्स ने अपनी शिपमेंट रोक दी है. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 2000 करोड़ रुपये के कंसाइनमेंट फिलहाल इंटरनेशनल पोर्ट्स पर अटके हुए हैं, जिन्हें ईरान से क्लीयरेंस मिलने का इंतजार है.
भारत बड़े पैमाने पर चावल का निर्यात करता है. दुनियाभर के 165 देशों में भारत से चावल एक्सपोर्ट किए जाते हैं. इराक, ईरान और सऊदी अरब भारत से प्रीमियम बासमती चावल खरीदते हैं. इस बीच, भारत को ईरान में प्रीमियम बासमती चावलों के एक्सपोर्ट में दिक्कतें आ रही हैं क्योंकि ग्लोबल ट्रेड में 45 मिलियन टन चावलों का निर्यात होता है. इनमें से अकेले भारत की हिस्सेदारी 22 मिलियन टन है. इनमें बासमती और नॉन-बासमती चावल दोनों ही शामिल हैं.
सब्सिडी हटने से एक्सपोटर्स को नुकसान होता है क्योंकि इससे उन्हें अपने उत्पादों पर करों और शुल्कों का पूरा भुगतान करना पड़ता है. इससे लागत बढ़ती है, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सामान और महंगा हो जाता है. सब्सिडी हटने से एक्सपोटर्स के मुनाफे पर सीधे असर पड़ता है और कई बार ये दूसरे देशों के निर्यातकों से पिछड़ भी जाते हैं. यही वजह है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान के इस फैसले से भारत के मुख्य बासमती उगाने वाले राज्य पंजाब और हरियाणा के प्रोड्यूसर्स और प्रोसेसर्स प्रभावित हुए हैं.
ईरान की सरकार ने यह फैसला लिया है कि अब सब्सिडी का पैसा सीधे देश के नागरिकों के अकाउंट्स में डाले जाएंगे ताकि वे अपनी जरूरत के हिसाब से खाने-पीने का सामान खरीद सके. सरकार चाहती है कि सब्सिडी का लाभ लोगों तक सीधे पहुंचे. इसी सिलसिले में ईरान ने अपने हर नागरिकों को अगले 4 महीने तक 600-600 रुपये की सब्सिडी देने का ऐलान किया है. सरकार का ऐसा मानना है कि सब्सिडी वाले एक्सचेंज रेट पर अरबों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद इसका फायदा देश की आम जनता को नहीं मिल पा रहा है.
लोग बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं. आयात पर दी जाने वाली सब्सिडी का लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पा रहा है क्योंकि सब्सिडी वाले एक्सचेंज रेट का इस्तेमाल कई सेक्टर्स आयात होने वाले सामानों की कीमत मनमानी तरीके से तय करने में कर रहे हैं. इससे कालाबाजारी बढ़ रही है. ईरानी सरकार ने खाने के सामान के इंपोर्ट पर कई सालों से दी जा रही सब्सिडी को जारी रखने से इनकार कर दिया है. इससे एक्सपोर्टर्स ट्रेड जारी रखने में हिचकिचा रहे हैं.
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक


