प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (25 फरवरी) को दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर इजरायल जा रहे हैं. इस दौरान दोनों देश डिफेंस, आर्थिक साझेदारी से लेकर अहम मुद्दों पर वार्ता करेंगे. इस दौरे के दौरान इजरायल की मिसाइल रक्षा प्रणाली आयरन डोम की तकनीक को लेकर भी चर्चा हो सकती है. इजरायल के लिए हमास, हिज़्बुल्ला और ईरान के खिलाफ जंग में ढाल बने आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम अब भारत को भी मिल सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को इजरायल की यात्रा पर जा रहे हैं. इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई अरब डॉलर की रक्षा डील पर मुहर लग सकती है. इन समझौतों में मिसाइल, एआई तकनीक, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हो सकते हैं.

PM नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे से पहले भारत और इजरायल के बीच बड़े रक्षा समझौते की संभावना जताई जा रही है. आयरन डोम की सफलता दर करीब 90 फीसदी बताई जाती है.

इसी बीच इजरायल ने भारत को आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम की तकनीक ट्रांसफर करने का बड़ा प्रस्ताव दिया है. यही सिस्टम है जिसका इस्तेमाल इजरायल ने हमास, हिज़्बुल्ला, ईरान और यमन के हूतियों के खिलाफ जंग में सफलतापूर्वक किया है. यह रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन हमलों के खिलाफ काफी असरदार है. चीन और पाकिस्तान के बढ़ते खतरे के बीच यह सिस्टम भारत के लिए मजबूत सुरक्षा कवच बन सकता है.

भारत में इजरायल के महावाणिज्यदूत यानिव रेवाच ने एक इंटरव्यू में कहा कि इजरायल भारत के साथ अपने रक्षा समझौते को और मजबूत करना चाहता है. उनका कहना है कि इजरायल अपनी तकनीक भारत के साथ साझा करना चाहता है और भारत में सैन्य उपकरणों का निर्माण भी करना चाहता है.

महावाणिज्यदूत ने कहा कि इजरायल भारत, अब्राहम अकॉर्ड्स के देशों, कुछ अफ्रीकी देशों और मिडिल ईस्ट के देशों जैसे साइप्रस और ग्रीस के साथ मिलकर एक नया सहयोग समूह बनाने की कोशिश कर रहा है. इसका मकसद कट्टरपंथी ताकतों से निपटना है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा इस पहल को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है.

आयरन डोम एक मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम है. इसे इजरायल की कंपनी राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने मिलकर बनाया है. यह कम दूरी के रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन को रोकने के लिए बनाया गया है. आयरन डोम की एक बैटरी में एक रडार, एक कंट्रोल सेंटर और एक लॉन्चर होता है. एक लॉन्चर में कम से कम 20 तमीर इंटरसेप्टर मिसाइलें होती हैं. यह सिस्टम हर हमले की दिशा और लक्ष्य का आकलन करता है.

इजरायल अब तक गाजा और लेबनान से आने वाले हजारों रॉकेट को मार गिरा चुका है. लेकिन यह महंगा भी है. एक तमीर इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत करीब 40 से 50 हजार डॉलर है. वहीं एक आयरन डोम बैटरी की कीमत करीब 10 करोड़ डॉलर तक हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को सस्ते विकल्प जैसे आयरन बीम पर भी ध्यान देना चाहिए, जो एक लेजर आधारित हथियार प्रणाली है.

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m