अनियमित कर्मचारियों के बदले सुर, मप्र के तर्ज पर छग के अनियमित कर्मचारियों ने सीएम के सामने रखी जॉब सिक्योरिटी समेत कई मांगें…

फाइल फोटो

रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के भारी बहुमत से जीत के बाद शासन के विभिन्न विभागों, योजनाओं तथा कार्यक्रमों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों में उत्साह का माहौल अब कही न कही विरोध के स्वर में होती नजर आ रही है.

अनियमित कर्मचारी होने का दंश विगत 15 वर्षों से झेल रहे अनियमित कर्मचारियों में सरकार के 51 दिनों के कार्यकाल के बाद भी कोई निर्णय उनके पक्षों में न आने से मायूसी के साथ साथ विरोधी स्वर फूटने लगे है. अनियमित कर्मचारियों की मांगों को घोषणा पत्र में सम्मिलित किया था. जिसमें उनके द्वारा समस्त अनियमित कर्मचारियों, जिनमें संविदा, दैनिक वेतनभोगी, प्लेसमेंट आदि सभी तरह के अनियमित कर्मचारी/अधिकारी के नियमितीकरण की बात कही गयी थी. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल एवं कांग्रेस घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष टी. एस. सिंहदेव ने पूरे राज्य में दौरा करके प्रभावी घोषणा पत्र बनाया था, घोषणा पत्र तैयार करने के लिए उन्होंने सभी जिलों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों से मुलाकात की तथा उसी समय उन्हें पूर्ण भरोसा दिया कि अनियमित कर्मचारियों की मांग जायज है और हम इसे घोषणा पत्र में शामिल करेंगे और कांग्रेस की सरकार बनते ही 1 माह के भीतर आपकी मांगों को पूर्ण करेंगे.

वहीं अनियमित कर्मचारियों के आंदोलनों के समय कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व भूपेश बघेल, टी.एस.सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू ,चरण दास महंत,रविन्द्र चौबे ,धनेंद्र साहू,अरुण वोरा सहित तमाम विधायकों तथा ग्राम पंचायत से लेकर जनपद एवं जिला पंचायत के प्रतिनिधियों ने इनके मांगों पर पूर्ण सहमति प्रदान करते हुए मांगों को पूर्ण किए जाने हेतु तत्कालीन भाजपा सरकार को पत्र भी जारी किया था. मांगे पूर्ण न होने पर कांग्रेस सरकार बनने के बाद मांगों को पूर्ण करने का भरोसा दिलाया था.

ज्ञात हो कि अनियमित कर्मचारियों ने विगत वर्षों में विभिन्न लड़ाइयां पूर्व की भाजपा सरकार के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर लड़ी. जिसमें अनियमित कर्मचारियों के ऊपर लाठियां बरसाई गई इन्हें जेल भी जाना पड़ा सैकड़ों अनियमित कर्मचारियों को अपने जॉब से हाथ धोना पड़ा था. समस्त विभागों के अनियमित कर्मचारियों ने मिलकर एक साथ अपनी मांगों को लेकर लड़ाई लड़ी जिसमें मुख्य रूप से स्वास्थ्य विभाग, पंचायत विभाग, कृषि विभाग, शिक्षा विभाग,उच्च शिक्षा विभाग, आई.टी.आई, विद्युत विभाग, नगरीय प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, जनपद/जिला पंचायत, उद्यानिकी, मछलीपालन विभाग, महिला बाल विकास विभाग, मंत्रालयीन अनियमित कर्मचारी एवं समस्त ऐसे कर्मचारी जो किसी न किसी प्रायोजन के तहत चाहे ठेके से अथवा आउटसोर्सिंग से कार्यरत लोग शामिल रहे.

अनियमित कर्मचारियों की मांगें-

1. समस्त विभागों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण.

2. 62 वर्ष तक जॉब सिक्योरिटी.

3. विगत वर्षों में निकाले गए अनियमित कर्मचारियों की उनके जॉब में वापसी.

4. ठेका प्रथा बन्द किया जावें तथा आउट सोर्सिंग में मध्यस्था खत्म किया जाए.

अनियमित कर्मचारियों का ये है कहना 

अनियमित कर्मचारियों को पूर्ण विश्वास है कि जिस प्रकार से उन्होंने विगत कई वर्षों से अपनी मांगों को लेकर लड़ाइयां लड़ी एवं जिस प्रकार से कांग्रेस पार्टी ने पूरे चुनावी प्रचार में अनियमित कर्मचारियों की मांगों को राष्ट्रीय नेतृत्व राहुल गांधी एवं राज्य के सभी प्रत्याशियों ने अपने भाषणों में सम्मिलित किया. पूरे रायपुर एवं राज्य के हर एक कोने में हमारी मांगो के सम्बंध में जो प्रचार प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, पाम्पलेट एवं फ्लेक्स के माध्यम से प्रचार किया उसका परिणाम अनियमित कर्मचारियों ने अपने मतों के माध्यम से दिया है और इसका पूर्ण प्रतिफल कांग्रेस सरकार उन्हें देगी, लेकिन जिस प्रकार से सरकार गठन पश्चात 4 कैबिनेट बैठक,1 अनुपूरक बजट एवं वर्तमान वित्तीय बजट में अनियमित कर्मचारियों के लिए कोई प्रावधान नहीं होने से लगातार अनियमित कर्मचारियों को भविष्य को लेकर संसय बना हुआ है.

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मध्यप्रदेश के 2 लाख अनियमित संविदा कर्मचारियों को 8 फरवरी को सौगात देते हुए 62 वर्ष के जॉब सिक्योरिटी की घोषणा करते हुए अवर सचिव सामान्य प्रसाशन से पत्र जारी करते हुए संविदा अनियमित कर्मचारियों के भविष्यको सुरक्षित कर दिया है. अब देखना होगा छत्तीसगढ़ में बड़े फैसलों के दौर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अनियमित कर्मचारियों के भविष्य के लिए कितना समय लेते है.

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