गरियाबंद। स्वामी विवेकानंद जयंती के पावन अवसर पर आईएसबीएम विश्वविद्यालय, छुरा में राष्ट्रीय युवा दिवस का अत्यंत भव्य, अनुशासित एवं प्रेरणादायक आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर युवाशक्ति, राष्ट्रभक्ति और विवेकानंद के ओजस्वी विचारों से गूंज उठा। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को आत्मविश्वास, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रनिर्माण के मार्ग पर अग्रसर करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत के उपरांत विवेकानंद वंदना से हुआ, जिसे अन्नपूर्णा साहू ने भावविभोर प्रस्तुति के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के संघर्षपूर्ण जीवन, उनकी कठोर साधना, देश और समाज के प्रति उनकी अपार निष्ठा तथा युवाओं के प्रति उनके अटूट विश्वास को प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत किया। उनके वक्तव्य ने उपस्थित विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा दी। इसके पश्चात डॉ. विश्वनाथन, अधिष्ठाता (विज्ञान संकाय) ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद केवल एक संत नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माता थे, जिनकी सोच आज भी युवाओं को सही दिशा प्रदान करती है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अकादमिक अधिष्ठाता, आईक्यूएसी निदेशक एवं आईआईसी अध्यक्ष ने कहा कि “उम्र छोटी होना कोई बाधा नहीं है, बल्कि कार्यों की महानता ही व्यक्ति को महान बनाती है।” उन्होंने विश्वविद्यालय में नवाचार, शोध, स्टार्टअप एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए संचालित किए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी दी और कहा कि इससे युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा तथा भारत को विकसित राष्ट्र 2047 के लक्ष्य की ओर सशक्त रूप से अग्रसर किया जाएगा।

परीक्षा नियंत्रक डॉ. मनीष उपाध्याय ने स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक वचनों का उल्लेख करते हुए कहा कि असफलता जीवन का अंत नहीं, बल्कि सफलता की सीढ़ी होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को धैर्य, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने युवाओं को कर्मठ, जिज्ञासु और साहसी बनने का संदेश देते हुए कहा कि “युवा ही राष्ट्र की नींव हैं और कर्म ही प्रगति का मार्ग है।” उन्होंने भारत को विश्वगुरु बनाने में युवाओं की निर्णायक भूमिका पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि “आज भारत युवाओं का देश है। यदि युवा जागरूक, आत्मनिर्भर और कर्मशील बन जाएं तो भारत विश्व की सबसे बड़ी शक्ति बन सकता है।” उन्होंने युवाओं को तीन मूल मंत्र दिए—आत्मबल, आत्मशक्ति और कर्म। उन्होंने कहा कि मनुष्य जैसी सोच रखता है, वैसा ही उसका भविष्य बनता है, इसलिए हर युवा को सकारात्मक सोच और दृढ़ निश्चय के साथ प्रतिदिन अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए।

इसके पश्चात लक्ष्मीकांत सिन्हा ने युवाओं के विचार, जिम्मेदारियों और राष्ट्रनिर्माण में उनकी भूमिका पर प्रभावशाली वक्तव्य प्रस्तुत किया, जिससे विद्यार्थियों में नई ऊर्जा और चेतना का संचार हुआ। कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम संयोजक एवं आईआईसी सचिव टेकेश्वर कौशिक ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन युवाओं को विवेकानंद के विचारों से जोड़कर राष्ट्रसेवा के पथ पर आगे बढ़ाने का एक सशक्त प्रयास है।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय युवा दिवस का यह आयोजन विश्वविद्यालय के इतिहास में एक प्रेरणादायक अध्याय के रूप में स्मरणीय बन गया, जिसने युवाओं को अपने लक्ष्य के प्रति सजग, सशक्त और समर्पित बनने का संदेश दिया। पूरे कार्यक्रम का कुशल, सुस्पष्ट एवं गरिमामयी संचालन सुकृति पाठक द्वारा किया गया, जिनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली एवं अनुशासित बना दिया।

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