पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद शुक्रवार को उस समय दहल गई, जब एक शिया मस्जिद में भीषण आत्मघाती धमाका हुआ। शनिवार तक इस आतंकी हमले में मारे गए लोगों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है, क्योंकि अस्पतालों में भर्ती कई गंभीर रूप से घायल लोगों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस हमले की जिम्मेदारी वैश्विक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) ने ली है। संगठन ने इसे एक फिदायीन ऑपरेशन करार दिया है। धमाके के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल में जुटी हुई हैं।

इस बीच, पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने शनिवार को आरोप लगाया कि भारत उनके देश में उग्रवादी संगठनों की मदद कर रहा है। हालांकि, उन्होंने अपने इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। वहीं, भारत ने शुक्रवार को ही इस्लामाबाद की एक मस्जिद में हुए आत्मघाती विस्फोट को लेकर किसी भी तरह की संलिप्तता के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। भारत ने इन आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताया है।

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने शनिवार को दावा किया कि इस हमले के संदर्भ में दाएश (ISIS) और तालिबान के नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन इन संगठनों को कहीं न कहीं से वित्तीय सहायता और लक्ष्य मिल रहे हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने भारत की ओर इशारा किया। नकवी ने बिना कोई सबूत पेश किए आरोप लगाया और कहा, “मैं फिर से स्पष्ट रूप से कहता हूं कि उनका वित्तपोषण भारत से हो रहा है।” हालांकि, इससे पहले भारत इन आरोपों को सिरे से खारिज कर चुका है और उन्हें निराधार बताया है।

इस बीच, इस्लामिक स्टेट के आधिकारिक मुखपत्र ‘अमाक’ के माध्यम से जारी एक बयान में हमलावर की पहचान सैफुल्लाह अंसारी के रूप में की गई है। संगठन ने अंसारी की एक तस्वीर भी जारी की है, जिसमें वह संगठन के प्रति वफादारी की शपथ (बैया) लेते हुए दिखाई दे रहा है। बयान में दावा किया गया है कि यह हमला ‘इस्लामिक स्टेट इन पाकिस्तान प्रोविंस’ (ISPP) से जुड़े एक सदस्य द्वारा किया गया, जो कथित तौर पर 2019 से इस क्षेत्र में सक्रिय है। हालांकि, इन दावों को लेकर स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तान अपने सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने वाली गंभीर समस्याओं का समाधान करने के बजाय, अपनी घरेलू विफलताओं के लिए दूसरों को दोषी ठहराने का रास्ता चुन रहा है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत ऐसे सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करता है, जो न केवल निराधार हैं बल्कि निरर्थक भी हैं। इससे पहले, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी शुक्रवार को बिना कोई सबूत पेश किए आरोप लगाया था कि इस हमले में भारत और अफगानिस्तान का हाथ है। भारत ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए उन्हें बेबुनियाद बताया है।

मस्जिद पर हुए हमले के तुरंत बाद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस घटना में अपनी किसी भी संलिप्तता से इनकार किया था। इसके बाद इस्लामिक स्टेट (IS) की ओर से हमले की जिम्मेदारी लेने से यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने में अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क की भूमिका हो सकती है।

IS के बयान में सीरिया में सक्रिय ‘ज़ैनाबियून ब्रिगेड’ (प्रो-ईरान मिलिशिया) में शामिल पाकिस्तानी शियाओं का भी उल्लेख किया गया है। विश्लेषकों के मुताबिक, यह उल्लेख हमले के पीछे संभावित सांप्रदायिक प्रतिशोध की ओर इशारा करता है। हालांकि, इन दावों को लेकर स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं।

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