सुकमा। अति संवेदनशील क्षेत्र जगरगुंडा में विकास की नई किरण दिखाई दी है। वर्षों तक नक्सल प्रभाव और मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझते रहे इस इलाके में पहली बार सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई गई है। पूरे क्षेत्र के रोशन होने से ग्रामीणों में उत्साह और संतोष का माहौल है।

कभी शाम ढलते ही जहां अंधेरा और भय का वातावरण छा जाता था, वहीं अब सोलर लाइट की उजास ने नई उम्मीद जगा दी है। गांव की गलियों और मुख्य मार्गों पर लगी सोलर स्ट्रीट लाइट से न सिर्फ सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है, बल्कि दैनिक जीवन भी आसान हुआ है।

बच्चों की पढ़ाई और रात का आवागमन हुआ सुगम

ग्रामीणों का कहना है कि रोशनी मिलने से बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिल रहा है। पहले अंधेरे के कारण शाम होते ही गतिविधियां थम जाती थीं, लेकिन अब लोग रात में भी आसानी से आवाजाही कर पा रहे हैं। मवेशियों की देखरेख और जरूरी कामकाज में भी सुविधा हो रही है।

सरपंच और ग्रामीणों ने जताया आभार

इस महत्वपूर्ण पहल के लिए ग्राम पंचायत की सरपंच नित्या कोसमा, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि जिला कलेक्टर के सहयोग और मार्गदर्शन से यह कार्य संभव हो पाया।

सरपंच नित्या कोसमा के लगातार प्रयास, पत्राचार और विभागीय समन्वय के परिणामस्वरूप यह योजना धरातल पर उतर सकी। उन्होंने कहा कि यह विकास की केवल शुरुआत है। आगे पानी, सड़क, आवास और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।

बदलती तस्वीर, नई उम्मीद

ग्रामीणों का कहना है कि एक समय नक्सलियों के प्रभाव के कारण जगरगुंडा दशकों तक अंधेरे में डूबा रहा। लेकिन अब बदलते दौर में शासन की योजनाएं गांव तक पहुंच रही हैं। सोलर लाइट की यह पहल न केवल रोशनी लेकर आई है, बल्कि विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का संकेत भी दे रही है।

जगरगुंडा में जलती सोलर लाइटें आज सिर्फ उजाला नहीं, बल्कि बदलते हालात और नई उम्मीदों की प्रतीक बन गई हैं।

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