सुप्रिया पांडेय, रायपुर। एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी हत्याकांड मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आज अमित जोगी को दोषी मानते हुए 3 हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है. हाई कोर्ट के इस फैसले पर दिवंगत रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने संतोष जताते हुए कहा कि आज उनके परिवार को पूर्णतः न्याय मिला है. अंततः सत्य की जीत हुई है. यही उनके पिता को सच्ची श्रद्धांजलि है.
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सतीश जग्गी ने हाई कोर्ट के फैसले के बाद लल्लूराम डॉट कॉम से चर्चा में कहा शुरू से ही वे सीबीआई जांच चाहते थे. सीबीआई ने इस मामले में साक्ष्य जुटाए और अपने केस में अमित जोगी को मुख्य आरोपी बनाया था, फिलहाल मामला न्यायालय में है. उन्होंने अपने संघर्ष को याद करते हुए बताया कि हत्या के पहले ही दिन उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी और अमित जोगी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी, लेकिन बाद में एक फर्जी आरोपी लाकर खड़ा किया गया और उनकी एफआईआर को शून्य करार दिया गया.
सतीश जग्गी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने निष्पक्ष जांच के लिए मामले को सीबीआई को सौंपा. उन्होंने कहा कि जब सीबीआई जांच शुरू हुई, उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, इसके बावजूद जांच एजेंसी ने बहुत अच्छा काम किया.
अमित जोगी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सतीश जग्गी ने कहा कि 23 साल का वक्त कोई छोटा समय नहीं होता. एक साधारण परिवार को मुख्यमंत्री के परिवार से न्याय की लड़ाई लड़नी पड़ी, जिसमें कई बाधाएं आईं. उनके परिवार ने बहुत कुछ सहा, डर और दबाव भी झेला. 23 साल कहना आसान है, लेकिन ऐसे प्रभावशाली परिवार से लड़ना, जिसके पास सब कुछ हो और उनके पास कुछ भी नहीं, यह बेहद कठिन था. उनके पास सिर्फ सत्य था और आज उसी सत्य की जीत हुई है.
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