शिवम मिश्रा, रायपुर। रायपुर केंद्रीय जेल से उम्रकैद की सजा काट रहा बंदी चंद्रवीर उर्फ पिंटू फरार होने की घटना ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल के आरोपों के बाद अब जेल प्रशासन ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि कैदियों को जेल परिसर से बाहर श्रम कार्य पर भेजना जेल मैनुअल का हिस्सा है और इसके लिए अदालत की अनुमति जरूरी नहीं है।

जेल प्रशासन ने एक विज्ञप्ति जारी की और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कैदियों को जेल परिसर से बाहर श्रम कार्य पर लगाने का प्रावधान जेल मैनुअल में मौजूद है। इसके लिए अदालत की अनुमति की जरूरत नहीं होती और इसका अधिकार जेल अधीक्षक को है। प्रशासन ने बताया कि सिर्फ वर्ष 2023 में 16,020 बार कैदियों को रायपुर केंद्रीय जेल से बाहर श्रम कार्य के लिए भेजा गया था। यह कोई नई परंपरा नहीं है बल्कि मध्यप्रदेश शासनकाल से ही प्रचलित है और देश की अन्य जेलों में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाती है।
जेल प्रशासन ने घटना का ब्यौरा देते हुए बताया कि 21 अगस्त 2025 को कैदियों को जेल परिसर के भीतर ही स्थित क्वार्टर के पास क्षतिग्रस्त गेट की मरम्मत के लिए भेजा गया था। इस दौरान कैदी चंद्रवीर उर्फ पिंटू मौके से फरार हो गया। उसके साथ लोहार प्रशिक्षक विष्णुदेव ठाकुर और जेल प्रहरी मनीष राजवाड़े मौजूद थे। घटना के तुरंत बाद ही फरार कैदी के खिलाफ थाना गंज, रायपुर में धारा 262 बीएनएस के तहत एफआईआर (नं. 220/2025) दर्ज की गई। साथ ही दोनों जिम्मेदार कर्मचारियों को उसी दिन निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि घटना को छुपाने की कोशिश नहीं की गई, क्योंकि 22 अगस्त को ही कई समाचार पत्रों में इसकी जानकारी प्रकाशित हो चुकी थी। साथ ही फरार कैदी की गिरफ्तारी के लिए अन्य राज्यों की पुलिस से भी सहयोग लिया जा रहा है।

पूर्व सीएम ने गृहमंत्री पर लगाए थे आरोप
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा था कि गृहमंत्री विजय शर्मा ने “कवर्धा सदन” का निर्माण कराया है और इसके लिए जेल के कैदियों से मजदूरी करवाई गई। इसी दौरान उम्रकैद की सजा काट रहा एक कैदी फरार हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रदेश के इतिहास में पहली बार हुआ है कि किसी मंत्री ने ऐसा सदन बनवाया और उसमें कैदियों को मजदूरी पर लगाया।
पूर्व CM ने सवाल उठाए कि फरार हुए कैदी को जेल से बाहर लाने की अनुमति न्यायालय ने दी थी या नहीं? इस कैदी के फरार होने का जिम्मेदार कौन है और उस पर क्या कार्रवाई हुई? “कवर्धा सदन” का खर्च कौन उठा रहा है और किस नियम के तहत मंत्रियों को इस तरह के सदन बनाने की अनुमति दी गई है? बघेल ने इस प्रकरण की हाईकोर्ट के सिटिंग जज से जांच कराने की मांग की और कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को इस पर जवाब देना चाहिए।
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