जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की विशेष अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। मामले में गिरफ्तार 10 आरोपियों को कोर्ट ने 5 मार्च तक के लिए न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में भेज दिया है। एसीबी ने आरोपियों से पूछताछ के लिए दो दिन की अतिरिक्त रिमांड मांगी थी, जिसे अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों के बाद सिरे से खारिज कर दिया।

कोर्ट में रिमांड पर तीखी बहस
पिछली पेशी के दौरान कोर्ट ने आरोपियों को तीन दिन की रिमांड पर भेजा था। रिमांड अवधि खत्म होने पर जब एसीबी ने दो दिन का और समय मांगा, तो बचाव पक्ष के वकील गौरीशंकर खंडेलवाल ने इसका पुरजोर विरोध किया। खंडेलवाल ने दलील दी कि एसीबी के पास पूछताछ के लिए कोई ठोस आधार या नए बिंदु शेष नहीं हैं। कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलील को सही मानते हुए रिमांड की मांग को नामंजूर कर दिया और सभी आरोपियों को जेल भेजने के आदेश दिए।
979 करोड़ का भ्रष्टाचार: फर्जी अनुभव और घटिया पाइप
यह घोटाला ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर जल पहुंचाने की योजना में 979 करोड़ रुपये से अधिक की अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच में सामने आया है कि ठेकेदारों ने मिलीभगत कर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र बनवाए और बड़े टेंडर हासिल किए। टेंडर मिलने के बाद कई इलाकों में मानक से बेहद कम गुणवत्ता वाले पाइप डाले गए। चौकाने वाली बात यह भी है कि कई स्थानों पर बिना काम किए ही करोड़ों रुपये का भुगतान उठा लिया गया।
जांच के घेरे में बड़े नाम
एसीबी की जांच की आंच अब विभाग के बड़े रसूखदारों तक पहुंच गई है। पूर्व मंत्री महेश जोशी और रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल इस जांच के रडार पर हैं। सूत्रों के अनुसार, रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल समेत तीन प्रमुख आरोपियों की तलाश में एसीबी की टीमें जयपुर सहित तीन अन्य शहरों में लगातार छापेमारी कर रही हैं।
जेजेएम घोटाला: अधिकारियों और ठेकेदारों का अपवित्र गठबंधन
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना में राजस्थान में हुए इस भ्रष्टाचार ने प्रशासनिक तंत्र पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। आरोप है कि जलदाय विभाग (PHED) के उच्चाधिकारियों और ठेकेदारों के बीच एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। फिलहाल एसीबी के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय परतों को खोलने में जुटा है।
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