दिल्ली में सड़क पर बने गड्ढे की वजह से हुई दर्दनाक मौत के मामले में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने द्वारका कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह मामला फरवरी महीने में जनकपुरी इलाके में हुए उस हादसे से जुड़ा है, जिसमें बाइकर कमल ध्यानी की जान चली गई थी। पुलिस के मुताबिक, ध्यानी अपनी बाइक से गुजर रहे थे, तभी सड़क पर मौजूद गहरे गड्ढे में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

इस मामले में जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास हरजोत सिंह औजला ने चार्जशीट पर विचार के लिए तारीख तय की है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अगली सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी (IO) और संबंधित एसएचओ को उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा। मजिस्ट्रेट ने 7 अप्रैल को निर्देश दिया था कि मामले को 30 अप्रैल को दोबारा सूचीबद्ध किया जाए और संबंधित अधिकारियों को तलब किया जाए। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए राजेश कुमार प्रजापति और योगेश नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन पर सड़क के रखरखाव में लापरवाही और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले को गंभीर मानते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई सख्त धाराएं लगाई हैं, जिनमें शामिल हैं-

धारा 105 – गैर-इरादतन हत्या

धारा 238A – सबूत मिटाना

धारा 61(2) – छोटे अपराध के लिए आपराधिक साजिश

धारा 238B – बड़े अपराध में सबूत मिटाना

धारा 340(2) – जाली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करना जांच में सामने आया कि हादसे के बाद मामले से जुड़े सबूतों को छिपाने और दस्तावेजों में हेरफेर करने की भी कोशिश की गई। इसी आधार पर पुलिस ने साजिश और सबूत मिटाने जैसी धाराएं जोड़ी हैं। अदालत ने इस केस के आरोपी सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी।

आरोपी का क्या था दावा?

राजेश कुमार ने कोर्ट में दावा किया था कि उन्हें गैर-कानूनी तरीके से पुलिस हिरासत में रखा गया, थाने की सीसीटीवी फुटेज मंगवाने की मांग की जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास हरजोत सिंह औजला ने आरोपी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर थाने के सामने वाले गेट की सीसीटीवी फुटेज मौजूद है. गिरफ्तारी मेमो, जीडी एंट्री और CDR (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) भी पेश किए गए हैं. ये सभी सबूत बताते हैं कि आरोपी को गैर-कानूनी रूप से हिरासत में नहीं रखा गया कोर्ट के मुताबिक, आरोपी की गिरफ्तारी और हिरासत 7 फरवरी को सामान्य जांच प्रक्रिया के तहत ही हुई थी।

पुलिस ने क्या पेश किया?

दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट के साथ CDR रिकॉर्ड, अन्य जरूरी दस्तावेज कोर्ट में जमा किए हैं, जिससे गिरफ्तारी की वैधता साबित होती है।  फरवरी में जनकपुरी में सड़क के गड्ढे में गिरने से बाइकर कमल ध्यानी की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या, साजिश और सबूत मिटाने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। अब इस केस में 30 अप्रैल को चार्जशीट पर सुनवाई होनी है, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आवेदक द्वारा अवैध हिरासत का जो आरोप लगाया गया था, उसकी जांच में न्यायालय का काफी समय और प्रयास लगा। हालांकि, जांच के दौरान आवेदक की ओर से ऐसा कोई ठोस साक्ष्य या प्रथम दृष्टया प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका, जिससे इस आरोप की पुष्टि हो सके। इसके उलट, रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्य खासतौर पर कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) इस दावे के विपरीत संकेत देते हैं।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब आरोपों के समर्थन में कोई ठोस या बुनियादी सामग्री उपलब्ध नहीं हो, और रिकॉर्ड से भी उन्हें कोई पुष्टि न मिल रही हो, तो ऐसे में अदालत से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह ‘फिशिंग और रोविंग’ यानी बिना ठोस आधार के व्यापक तलाश या छानबीन शुरू करे। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि मामले की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जनकपुरी थाने के जांच अधिकारी/एसएचओ को निर्देश दिए गए थे कि वे 6 फरवरी से 8 फरवरी के बीच की अवधि का थाने से संबंधित सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करें।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m