पटना। बिहार की राजनीति में राज्यसभा नामांकन के बड़े घटनाक्रम के बीच जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर गहरा असंतोष उभरकर सामने आया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब पटना विधानसभा परिसर में एनडीए उम्मीदवारों के नामांकन के लिए पहुंचे, ठीक उसी वक्त पार्टी के पुराने वफादार और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के पक्ष में नारों ने सियासी हलचल तेज कर दी।
नेतृत्व के खिलाफ आक्रोश और नारेबाजी
नामांकन प्रक्रिया से पहले मुख्यमंत्री आवास और जेडीयू कार्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने पार्टी के शीर्ष नेताओं- ललन सिंह, विजय चौधरी और संजय झा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पार्टी के वर्तमान निर्णयों में जमीनी कार्यकर्ताओं की भावनाओं की अनदेखी की जा रही है, जिससे संगठन के भीतर भारी मायूसी और उदासीनता का माहौल है।
असली एजेंट कौन?
विरोध का मुख्य केंद्र आरसीपी सिंह की पार्टी में वापसी की मांग रही। जेडीयू नेता वरुण कुमार और प्रिंस कुमार ने पार्टी के मौजूदा नेतृत्व को आड़े हाथों लिया। कार्यकर्ताओं ने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि अतीत में आरसीपी सिंह को ‘भाजपा का एजेंट’ कहकर निशाना साधा गया था, लेकिन आज की परिस्थितियों ने साफ कर दिया है कि वास्तव में पार्टी को कौन कमजोर कर रहा है।
संगठन की मजबूती के लिए RCP की जरूरत
कार्यकर्ताओं का मानना है कि संगठन को बिखरने से बचाने के लिए आरसीपी सिंह का वापस आना अनिवार्य है। उनका तर्क है कि यदि वे पार्टी में होते, तो आज ऐसी असहज स्थिति पैदा नहीं होती। यह विरोध न केवल सांगठनिक मतभेदों को दर्शाता है, बल्कि आने वाले समय में जेडीयू के भीतर बड़े शक्ति-संघर्ष का संकेत भी दे रहा है।
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