पटना। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। जानकारों का मानना है कि यह बैठक नीतीश सरकार में संभावित कैबिनेट विस्तार से जुड़ी हो सकती है, जबकि कुछ इसे शिष्टाचार भेंट और भविष्य की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।

सोशल मीडिया से मिली पुष्टि

अमित शाह से मुलाकात की जानकारी खुद संजय झा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी। उन्होंने लिखा कि दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार भेंट कर देशहित और बिहार से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। इस बयान के बाद कैबिनेट विस्तार की अटकलों को और मजबूती मिली है।

इसी महीने हो सकता है मंत्रिमंडल विस्तार

सूत्रों के अनुसार, नीतीश कैबिनेट का विस्तार इसी महीने होने की संभावना है। वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित बिहार मंत्रिमंडल में कुल 26 मंत्री हैं, जबकि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार अधिकतम 36 मंत्री हो सकते हैं। यानी अभी 10 पद रिक्त हैं। एनडीए फॉर्मूले के तहत इनमें से 6 सीटें जेडीयू और 4 बीजेपी के हिस्से में जा सकती हैं।

सामाजिक संतुलन साधने की तैयारी

जेडीयू इस विस्तार के जरिए जातीय, सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है। मौजूदा कैबिनेट में राजपूत, दलित, भूमिहार और कुशवाहा-कुर्मी समाज का प्रतिनिधित्व पहले से मौजूद है। ऐसे में इस बार अति-पिछड़ा वर्ग, निषाद, धानुक, वैश्य समुदाय और महिलाओं को मौका मिलने की चर्चा है। नए चेहरों को शामिल कर पार्टी आगामी चुनावों से पहले समावेशी संदेश देना चाहती है।

प्रशासनिक दबाव भी बना कारण

मंत्रिमंडल विस्तार प्रशासनिक दृष्टि से भी जरूरी माना जा रहा है। जेडीयू कोटे के बिजेंद्र प्रसाद यादव के पास पांच और विजय चौधरी के पास चार विभागों का अतिरिक्त भार है। बीजेपी के भी कई मंत्रियों के पास दो-दो विभाग हैं। इसके अलावा बीजेपी नेता नितिन नवीन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद इस्तीफा देने से एक पद पहले ही खाली हो चुका है।