JP Property Dispute: जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण को लेकर छिड़ी कॉर्पोरेट जंग देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गई है। जेपी प्रॉपर्टी विवाद में अडानी के खिलाफ वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) का दरवाजा खटखटाया है। अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता (Vedanta) ने अडानी समूह (Adani Group) द्वारा जेपी की संपत्तियों के अधिग्रहण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। वेदांता ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें अडानी ग्रुप को रेजोल्यूशन प्लान के तहत जेपी की संपत्तियों को संभालने की मंजूरी दी गई थी।
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर किया है। सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि यदि मॉनिटरिंग कमेटी इस दौरान कोई भी बड़ा ‘नीतिगत फैसला’ लेना चाहती है, तो उसे पहले NCLAT से अनुमति लेनी होगी।
देश के शीर्ष न्यायालय ने कहा कि क्योंकि यह मामला पहले से ही 10 अप्रैल को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के पास सुनवाई के लिए लगा हुआ है। लिहाजा देश के शीर्ष न्य़ायालय ने NCLAT से अनुरोध किया कि वह तय तारीख (10 अप्रैल) पर ही इस मामले की सुनवाई करे। चूंकि अपील पर जल्द फैसला होने की उम्मीद है, इसलिए कोर्ट ने कोई नया स्टे ऑर्डर जारी नहीं किया।
वेदांता ने क्या दलील रखी
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वेदांता की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि उनकी कंपनी ने बड़ी बोली लगाई थी। सिब्बल ने कहा किहमारी बोली अडानी की तुलना में 3000 करोड़ रुपये अधिक थी। हमें बकायदा पत्र देकर बताया गया था कि हम सबसे ऊंचे बोलीदाता हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रक्रिया में विसंगतियां बरती गईं। वेदांता ने कोर्ट से गुहार लगाई कि जब तक इस मामले की पूरी सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक संपत्तियों का ट्रांसफर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से फॉर्मूला 1 (F1) ट्रैक और कई अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स के अधिग्रहण पर चिंता जताई।
प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान जेपी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील ए.एम. सिंघवी ने कहा कि रेजोल्यूशन प्रोफेशनल ने इस पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया कि किसकी योजना बेहतर है। वहीं, अडानी समूह का पक्ष रखते हुए मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि वेदांता ने शुरुआती स्तर पर योजना का विरोध नहीं किया था। जस्टिस बागची ने इस दौरान टिप्पणी की कि क्रेडिटर्स की समिति (COC) के किसी भी बड़े फैसले या कदम के लिए संबंधित अधिकारियों और ट्रिब्यूनल का अनुमोदन अनिवार्य है।
क्या है पूरा विवाद?
जून, 2024 में जयप्रकाश एसोसिएट्स (Jaiprakash Associates) को दिवालिया प्रक्रिया में शामिल किया गया था क्योंकि कंपनी पर करीब 57185 करोड़ रुपये का लोन था। JAL के अधिग्रहण के लिए कई बड़ी कंपनियां दौड़ में थीं। वेदांता के चैयरमेन ने हाल ही में ट्वीट करके बताया कि उन्हें वेदांता को सितंबर में ही जेपी ग्रुप की संपत्ति के लिए बोली जीतने की लिखित पुष्टि मिली थी। हालांकि बाद में इस फैसले को पलट दिया गया। इसको लेकर वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की। वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दिवालिया हो चुके जेपी ग्रुप की संपत्तियों के लिए अडानी ग्रुप द्वारा प्रस्तुत समाधान योजना पर रोक लगाने की मांग की थी। जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है।
जयप्रकाश एसोसिट्स पर 57185 करोड़ रुपये का कर्ज
जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) भारत के सबसे बड़े दिवालिया मामलों में से एक है। कंपनी पर कुल 57,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है। इसी कारण जून 2024 में कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में चली गई। कंपनी के पास कई तरह की बड़ी संपत्तियां हैं। इनमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा के जेपी ग्रीन्स जैसे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट, आने वाले जेवर एयरपोर्ट के पास जयपी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी, इसके अलावा होटल और कई इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस शामिल हैं।
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