Justice Ujjal Bhuyan On Judiciary Independence: विधायिका और न्यायपालिका (Legislature and Judiciary) में काम के हस्तक्षेप को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर से तूल पकड़ सकता है। पिछले दिनों विधायिका के कार्य में न्यायपालिका के हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठे थे। वहीं अब न्यायपालिका के क्षेत्र में कार्यपालिका के दखलअंदाजी को लेकर सवाल उठा है। ये सवाल सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जज जस्टिस उज्ज्वल भुयान ने उठाया है। जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने शनिवार को कहा कि जजों का ट्रांसफर न्यायपालिका का आंतरिक मामला है। इसमें सरकार या केंद्र की कोई भूमिका नहीं है। संविधान सर्वोच्च है और सरकार को जजों के तबादले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

दरअसल जस्टिस उज्ज्वल भुयान ने केंद्र के सुझाव पर जस्टिस अतुल श्रीधरन को MP हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर करने के कॉलेजियम के फैसले पर अपनी असहमति और निराशा जताई। जस्टिस भुयान ने पुणे के ILS लॉ कॉलेज में संवैधानिक नैतिकता और लोकतांत्रिक शासन विषय पर प्रिंसिपल जी वी पंडित मेमोरियल में यह बात कही।

उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ फैसले देने वाले जजों का तबादला करना न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हस्तक्षेप है। जस्टिस श्रीधरन का नाम लिए बिना, जस्टिस भुयान ने पूछा कि किसी जस्टिस को सिर्फ इसलिए एक हाई कोर्ट से दूसरे हाई कोर्ट में क्यों ट्रांसफर किया जाना चाहिए क्योंकि उसने सरकार के खिलाफ कुछ असुविधाजनक आदेश पारित किए थे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अगस्त 2025 में जस्टिस श्रीधरन का ट्रांसफर मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में करने की सिफारिश की थी, लेकिन केंद्र की अपील पर कॉलेजियम ने अपना फैसला बदल दिया।

जस्टिस श्रीधरन का ट्रांसफर बदला गया

बता दें कि अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन का ट्रांसफर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बदलकर इलाहाबाद हाई कोर्ट करने की सिफारिश की थी। कॉलेजियम के बयान में यह दर्ज था कि यह बदलाव केंद्र सरकार के पुनर्विचार अनुरोध के बाद किया गया।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जस्टिस श्रीधरन सीनियरिटी के आधार पर कॉलेजियम का हिस्सा बनते, जबकि इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनकी सीनियरिटी काफी नीचे थी। यह फैसला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि जस्टिस श्रीधरन की पहचान एक स्वतंत्र जज के रूप में रही है, जिनमें BJP मंत्री विजय शाह के खिलाफ कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई टिप्पणी के मामले में स्वत: संज्ञान लेकर FIR दर्ज करने का आदेश शामिल है।

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