कुर्सी को लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच लम्बे समय से चल रही खींचतान के बीच अब खबर आई है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आलाकमान जल्द सीएम के करीबियों पर सख्त एक्शन लेने वाला है. दिल्ली से हाल ही में आदेश जारी होने के बाद अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया था. और अब मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव नजीर अहमद को भी आलाकमान ने पद छोड़ने के लिए कह दिया है. इसे लेकर शनिवार को सिद्धामैया और हाईकमान के बीच देर रात तक कई दौर की बातचीत हुई.

क्यों लिया जा रहा है एक्शन ?

दरअसल, हाईकमान को जानकारी मिली थी कि दावणगेरे दक्षिण में पार्टी के कई सदस्य पार्टी के भीतर रहकर भीतरघात करने का काम कर रहे हैं. जिसके बाद अब आलाकमान ने निर्देश दिया है कि सम्बंधित क्षेत्र में पार्टी के खिलाफ काम करने वाले लोगों के पर कार्रवाई की जाए. इस हिट लिस्ट में सिद्धारमैया के करीबी सहयोगी और पूर्व जद(एस) नेता जमीर अहमद खान भी आ गए हैं. इंटेलिजेंस विंग और AICC सचिव अभिषेक दत्त की दो अलग-अलग रिपोर्टों में जब्बार, नजीर अहमद और जमीर को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल पाया गया. उनपर आरोप हैं कि उन्होंने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों का समर्थन किया. इसके साथ ही उनके कंपेन के लिए फंडिंग की और चुनाव में भी मदद की.

SDPI की मदद करने का आरोप

पार्टी को शक है कि इनमें से कुछ नेताओं ने वित्तीय रूप से SDPI की मदद की होगी, जो कांग्रेस के लिए किसी बड़ी राजनीतिक चुनौती से कम नहीं है. इंटेलिजेंस इनपुट्स ने दावणगेरे दक्षिण में एक SDPI उम्मीदवार के समर्थन से जुड़े वित्तीय लेनदेन को ट्रैक किया है. तीनों नेताओं ने एक अल्पसंख्यक उम्मीदवार, सादिक पहलवान के लिए भी पुरजोर दबाव बनाया था. इसके बाद सिद्धारमैया को आंतरिक असंतोष को शांत करने के लिए सेकेंड लाइन मुस्लिम नेताओं रिजवान अरशद और सलीम अहमद को आगे लाना पड़ा. जब्बार और नजीर अहमद के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद, सीएम अब जमीर अहमद खान को कैबिनेट से हटाने पर विचार कर रहे हैं.

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