Karthikeya Deepam Controversy: तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी (Thiruparankundram Hill) के कार्तिकेय दीपम विवाद में मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने तमिलनाडु की स्टालिन सरकार (Tamil Nadu Stalin Government) को झटका दिया है। मद्रास हाईकोर्ट ने ने तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ियों पर स्थित पत्थर के स्तंभ पर दीप जला ने की इजाजत दे दी है। सुनवाई के दौरान मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने स्टालिन सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि राजनीति से प्रेरित फैसला न लें। सार्वजनिक शांति बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और प्रशासन को राजनीतिक कारणों से प्रेरित होकर कोई भी कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।

।जस्टिस जी जयचंद्रन और जस्टिस केके रामकृष्णन की बेंच ने जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन के सिंगल बेंच ने पुराने फैसले को बरकार रखा है। कोर्ट ने कहा कि दीप जलाने के मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया गया, जबकि यह लंबे समय से चली आ रही धार्मिक परंपरा से जुड़ा मामला है।

अदालत ने साफ कहा कि राज्य सरकार और हजरत सुल्तान सिकंदर बदूशा अवुलिया दरगाह की ओर से ऐसा कोई मजबूत सबूत पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि किसी भी आगम शास्त्र में वहां दीप जलाने पर रोक है। राज्य सरकार की दलीलों पर सख्त रुख अपनाते हुए अदालत ने कहा कि यह मानना ‘हैरान करने वाला और समझ से परे’ है कि साल में सिर्फ एक दिन देवस्थानम के लोग पत्थर के स्तंभ पर दीप जलाएं और उससे कानून-व्यवस्था बिगड़ जाए।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी…

हाई कोर्ट ने राज्य के कानून-व्यवस्था बिगड़ने के डर को ‘काल्पनिक भूत’ कहा है। अदालत ने कहा कि दीपम जलाने की इजाज़त देने से शांति भंग नहीं होगी, जब तक कि गड़बड़ी ‘खुद राज्य द्वारा प्रायोजित’ न हो। राज्य और देवस्थानम यह साबित करने में नाकाम रहे हैं कि दीपम जलाना प्रचलित प्रथा नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जिला प्रशासन ने अपनी “सुविधा के लिए” शांति के लिए खतरा बताया। अदालत ने प्रशासन पर शक और अविश्वास के ज़रिए एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ खड़ा करने का आरोप लगाया है।

स्टालिन सरकार ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर लगा दी थी रोक

दरअसल यह पूरा मामला हिंदू तमिल पार्टी के नेता राम रविकुमार की याचिका से जुड़ा है, जिसमें कार्तिगई दीपम पर्व के दौरान पहाड़ी पर बने पत्थर के पिलर पर दीप जलाने की इजाजत देने की मांग की गई थी। पिछले साल 1 दिसंबर को जस्टिस स्वामीनाथन ने याचिका स्वीकार करते हुए दीपम जलाने का आदेश दिया था। हालांकि, तमिलनाडु की स्टालिन सरकार ने कानून-व्यवस्था की आशंका का हवाला देकर आदेश लागू करने से इनकार कर दिया था। सरकार ने जस्टिस स्वामीनाथन के फैसले पर आरोप लगाया कि जस्टिस स्वामीनाथन सांप्रदायिक तनाव भड़का रहे हैं। सरकार ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

देवस्थानम की जमीन पर स्थित है दीपथून

विवादित स्थल के मालिकाना हक पर स्पष्टता देते हुए मदुरै बेंच ने माना कि दीपथून देवस्थानम की भूमि पर स्थित है। कोर्ट के इस फैसले से मालिकाना हक को लेकर चल रही बहस पर विराम लग गया है। कोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया है कि वह सार्वजनिक शांति सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए और यह सुनिश्चित करे कि धार्मिक परंपराओं और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बना रहे।

पहाड़ी भगवान मुरुगन के 6 निवास स्थानों में से एक

तमिलनाडु के मदुरै से 10 किमी दूर दक्षिण में तिरुप्परनकुंड्रम शहर है। इसे भगवान मुरुगन के 6 निवास स्थानों में से एक माना जाता है। यहां की तिरुप्परनकुंड्रम पहाड़ी पर सुब्रमण्य स्वामी मंदिर है, जो छठी शताब्दी का माना जाता है। पहाड़ी की सबसे ऊंची चोटी पर दीपस्तंभ है। मान्यता है कि इतिहास काल से ही तमिल महीने कार्तिगई की पूर्णिमा तिथि (नवंबर-दिसंबर के दौरान) को कार्तिगई दीपम पर्व के दौरान स्तंभ पर दीपक जलाया जाता जाता रहा है। 17वीं शताब्दी में पहाड़ी पर सिकंदर बधूषा दरगाह का निर्माण कराया गया था।

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