सुमन शर्मा/कटिहार। बिहार में पूर्ण शराबबंदी को लागू करने की जिम्मेदारी संभाल रही पुलिस जब आपस में ही भिड़ जाए, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। कटिहार रेलवे स्टेशन पर एक ऐसी ही शर्मनाक घटना घटी, जहां शराब तस्करों को पकड़ने के बजाय पुलिस के दो विभाग मद्य निषेध इकाई और रेल पुलिस (GRP) एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए। इस ‘खाकी बनाम खाकी’ की जंग में एक सिपाही गंभीर रूप से घायल हो गया है।
गुप्त सूचना पर पहुंची थी टीम
घटना की शुरुआत तब हुई जब मद्य निषेध विभाग को सटीक जानकारी मिली कि हाटे बाजारे एक्सप्रेस के जरिए शराब की एक बड़ी खेप कटिहार स्टेशन पहुंचने वाली है। सूचना पुख्ता थी, इसलिए विभाग की टीम ने बिना वक्त गंवाए स्टेशन परिसर में घेराबंदी कर दी। टीम का उद्देश्य तस्करों को रंगे हाथ दबोचना था।
सहयोग के बदले हिंसक झड़प
जैसे ही मद्य निषेध विभाग की टीम ने अपनी कार्रवाई शुरू की, वहां तैनात GRP के जवानों के साथ उनका विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि रेल पुलिस ने कार्रवाई में सहयोग करने के बजाय टीम के काम में अड़ंगा डालना शुरू कर दिया। बहस इतनी बढ़ गई कि बात धक्का-मुक्की से होती हुई हिंसक मारपीट तक पहुंच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कानून के रखवाले अपराधियों की तरह एक-दूसरे पर हमला कर रहे थे।
सिपाही हुआ लहूलुहान
इस हिंसक झड़प में मद्य निषेध विभाग के सिपाही देव शंकर झा बुरी तरह घायल हो गए। उन्हें आनन-फानन में कटिहार सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार चल रहा है। विभाग के आला अधिकारियों ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताई है और GRP पर जानबूझकर तस्करी विरोधी अभियान को बाधित करने का आरोप लगाया है।
सिस्टम पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस घटना ने बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली और अंतर्विभागीय समन्वय की पोल खोल दी है। जब शराबबंदी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर दो सरकारी एजेंसियां ही आपस में लड़ेंगी, तो इसका सीधा फायदा शराब माफिया को होगा। फिलहाल, उच्च अधिकारियों ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन स्टेशन पर हुई इस नौबत ने प्रशासन की काफी किरकिरी करा दी है।
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