संस्कारधानी में किड्स फ्रेंडली कोविड वैक्सीनेशन सेंटर, कमरों की दीवारों पर उकेरे छोटा भीम और डोरेमॉन

2-12 साल के बच्चों को टीका लगाए जाने से पहले की तैयारी

कुमार इंदर, जबलपुर। जबलपुर में मनमोहन नगर में प्रदेश का पहला बच्चों का वैक्सीनेशन सेंटर बनाया गया है. इसे देश का पहला भवन भी बताया जा रहा है. इस फोटो खुद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सोशल नेटवर्क पर शेयर किया है. दरअसल, जबलपुर स्मार्ट सिटी ने मनमोहन नगर में किड्स फ्रेंडली कोविड वैक्सीनेशन सेंटर बनाया है. दो कमरे वाले इस भवन को सुंदर तस्वीरों के माध्यम से रंगा गया है. एक कमरे में जहां वैक्सीनेशन होगा. वहीं दूसरे कमरे में बच्चे खिलौनों के साथ वेटिंग हाल भी बनाया गया है. बताया जा रहा है कि यह देश का पहला किड्स फ्रेंडली कोविड वैक्सीनेशन सेंटर है. वैक्सीन सेंटर सहित पूरे पार्क को आकर्षक रंगों से संजाया गया है.

जबलपुर की स्मार्ट सिटी की पहल बनी मिशाल

जबलपुर के स्मार्ट सिटी में बने इस वैक्सीन सेंटर की तारीफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा है कि जरूरत के हिसाब से इस तरह के सेंटर दूसरे जिलों में भी खोले जा सकते हैं. मुख्यमंत्री ने हर जिले में इस तरह की कार्ययोजना बनाने के लिए वहां की जिला क्राइसिस मैनेजमेंट को निर्देश दिए हैं. इस भवन और परिसर को आकर्षक चटख रंगों से कलर किया गया है. वैक्सीनेशन कमरे का भी लुक ऐसा रखा गया है कि बच्चों का इंजेक्शन को लेकर डर दूर भाग जाए. यहां बच्चाें के खिलौने भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराए गए हैं. कार्टून कैरेक्टर से लेकर पार्क तक तैयार किया गया है.

बच्चों के वैक्सीनेशन के लिए ये चल रही कवायद

कोविड की तीसरी लहर की आशंका के बीच एक राहत वाली खबर ये आई है कि भारत बायोटेक की को-वैक्सीन 2 से 18 साल की उम्र के बच्चों के लिए भी प्रभावी है. जिसका ट्रायल भी सफल रहा है. इसके डाटा को SEC और ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) को सौंप दिया गया है. वहां से हरी झंडी मिलने के बाद बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू हो जाएगा.

बच्चों वैक्सीन का ट्रायल, कोई साइड इफेक्ट नहीं

भारत बायोटेक कंपनी ने बच्चों के लिए तैयार हुए को-वैक्सीन का ट्राॅयल डाटा SEC और डीसीजीआई को सौंपा है. डीसीजीआई ने कुछ जांच और परख के बाद मंजूरी दे दी है. जल्द ही बच्चों के लिए वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी. बच्चों को 28 दिन में 2 डोज लगाई गई. ट्रायल में वैक्सीन को बच्चों पर अधिक असरदार पाया गया और इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं मिला. वैक्सीन की मंजूरी मिलने से पहले बड़ी मात्रा में उत्पादन शुरू कर दिया गया है. बच्चों के वैक्सीनेशन के लिए हेल्थ विभाग को डाटा तैयार करने का निर्देश जारी किए हैं. पहले चरण में ऐसे बच्चों को वैक्सीन लगाई जा सकती है, जो गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, अस्थमा या हार्ट से संबंधी किसी समस्या से परेशान हैं

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