रायपुर। देशव्यापी मंदी से छत्तीसगढ़ के किसानों पर पड़ रहे दुष्प्रभाव के खिलाफ छत्तीसगढ़ किसान सभा प्रदेशव्यापी अभियान चलाने जा रही है. इसके साथ वामपंथी पार्टियों के संयुक्त आंदोलन के समर्थन में किसानों को लामबंद करने का फैसला किया है.

छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते तथा महासचिव ऋषि गुप्ता ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि नोटबंदी और जीएसटी के कारण पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी मार किसानों पर ही पड़ी है. इससे किसानों को उबारने के लिए मोदी सरकार को मनरेगा में काम खोलना चाहिए, वहीं फसलों को सी-2 लागत फार्मूले की डेढ़ गुना कीमत पर न्यूनतम समर्थन मूल्य देकर खरीदना चाहिए. इसके अलावा बेरोजगारी भत्ता, वृद्धों व विधवाओं के लिए पेंशन की व्यवस्था करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि भूमिहीनों और आदिवासियों सहित प्रदेश के 37 लाख किसान परिवार सरकारी ऋण योजना के दायरे से बाहर होने के कारण साहूकारी क़र्ज़ के जाल में फंसे हुए हैं. राज्य सरकार द्वारा बैंकिंग क़र्ज़ की माफ़ी की घोषणा के बावजूद बैंकों ने उन्हें क़र्ज़ मुक्ति के प्रमाणपत्र नहीं दिए हैं, और वे नए ऋण पाने से वंचित हैं. वनभूमि से आदिवासी भगाए जा रहे हैं, खेती की जमीन छीनी जा रही है, लेकिन कॉर्पोरेटों को धड़ल्ले-से जल-जंगल-जमीन और खनिज सौंपे जा रहे हैं.

किसान सभा ने कहा है कि वामपंथी पार्टियों ने किसानों की समस्याओं व उनकी मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया है. किसान सभा भी मंदी के खिलाफ उनके संघर्ष में किसानों को बड़े पैमाने पर लामबंद करेगी, जिससे जनहितकारी फैसले लेने के लिए मोदी सरकार को बाध्य किया जा सके.