किशनगंज। जिले के सदर अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर लापरवाही करने वाली तस्वीर सामने आई है। अस्पताल के पोस्टमार्टम रूम के समीप मेडिकल कचरे का एक विशाल ढेर जमा हो गया है, जो अब किसी बड़ी महामारी को निमंत्रण दे रहा है। बायोमेडिकल वेस्ट के सही निस्तारण न होने से पूरा परिसर भीषण दुर्गंध की चपेट में है, जिससे मरीज और स्वास्थ्यकर्मी दोनों ही गंभीर बीमारियों के मुहाने पर खड़े हैं।
खून से सनी पट्टियां और सुइयों का ढेर
अस्पताल के पोस्टमार्टम रूम के पास प्लास्टिक की बोतलें, इस्तेमाल की गई सिरिंज, नुकीली सुइयां, खून से सनी पट्टियां और अन्य संक्रामक अपशिष्ट बिखरे पड़े हैं। इस कचरे के लंबे समय से न हटाए जाने के कारण वातावरण इतना दूषित हो चुका है कि वहां से गुजरना भी दूभर है। ड्यूटी पर तैनात एक नर्स ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया, इस तीखी बदबू के कारण हमें दिन भर सिरदर्द बना रहता है और सांस लेने में भी तकलीफ होती है। यहां काम करना अब जान जोखिम में डालने जैसा है।
गंभीर बीमारियों का मंडराता खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बायोमेडिकल वेस्ट का इस तरह खुले में पड़ा रहना किसी जैविक खतरे से कम नहीं है। इससे एचआईवी (HIV), हेपेटाइटिस-बी और सी जैसे घातक रक्त-जनित संक्रमण फैलने की आशंका प्रबल हो गई है। चूंकि यह कचरा पोस्टमार्टम हाउस के पास है, इसलिए शवों से निकलने वाले बैक्टीरिया और वायरस के प्रसार का जोखिम और भी बढ़ जाता है। अस्पताल आने वाले मासूम बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्थिति प्राणघातक साबित हो सकती है।
प्रशासनिक उदासीनता और ठेकेदार की मनमानी
इस बदहाली के पीछे सफाई ठेकेदार और अस्पताल प्रशासन के बीच तालमेल की कमी साफ नजर आती है। कर्मचारियों का आरोप है कि कचरा उठाने वाली गाड़ी समय पर नहीं आती। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन की ढुलमुल निगरानी ने ठेकेदार को बेलगाम कर दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही नींद से जागेगा?
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