आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में संघ यात्रा के 100 वर्ष-नए क्षितिज कार्यक्रम में कई अहम मुद्दों पर बात की. इसमें टैरिफ का भी मुद्दा रहा, जिस पर उन्होंने कहा कि हम दुनिया से अलग-थलग नहीं रह सकते लेकिन लेन-देन करेंगे तो अपनी मर्जी से करेंगे. किसी के दबाव में नहीं करेंगे, ना ही टैरिफ देखकर फैसले लेंगे. हम जो भी खरीदारी करेंगे, वह अपने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली होगी. हमें स्वदेशी को अपनाना चाहिए.
संघ प्रमुख ने कहा, जहां कोई विकल्प नहीं है और विदेश के अलावा कोई रास्ता नहीं है, वहां विदेशी वस्तुओं को अपनाया जा सकता है. नीति के स्तर पर हम यह कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लेन-देन करना पड़ता है. नीति धीरे-धीरे चल रही है. नीति अपनी गति से बदलती है और आगे बढ़ेगी लेकिन अपने घर के स्तर पर हम स्वदेशी को लागू करेंगे.
संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए
संघ के कार्यों पर बात करते हुए उन्होंने कहा, संघ का काम अनोखा है, पूरी दुनिया में ऐसा काम नहीं है. संघ किसी दूसरी संस्था की प्रतिस्पर्धा में नहीं निकला है. न ही किसी रिएक्शन या विरोध में निकला है. संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए. संघ को पावर नहीं चाहिए. जितने भी भले काम देश में हो रहे हैं, वे ठीक से हो जाएं, उन्हें करने के लिए संघ है.
हेडगेवार जन्मजात देशभक्त थे
मोहन भागवत ने कहा, एक समाज के नाते हम एक समाज हैं क्या? इतने भेद, रूढ़ि-कुरीतियों का बोलबाला है. अशिक्षा है. इन सबसे उबारकर अपने समाज को एक स्वस्थ समाज के नाते खड़ा करने की जब तक कोशिश नहीं करते, हमारे प्रयास अधूरे रहेंगे. संघ निर्माता डॉ. हेडगेवार जन्मजात देशभक्त थे. बहुत कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने दो बातों को कभी नहीं छोड़ा- एक, अपनी पढ़ाई में हमेशा फ़र्स्ट क्लास आना. दूसरा, देश के लिए जो कुछ चल रहा था, उसमें सक्रियता से भाग लेना.
भारत में सब हिंदू ही हैं और कोई नहीं
उन्होंने कहा, संघ का मानना है कि भारत में सब हिंदू ही हैं और कोई नहीं है. हिंदू यानी क्या है? हिंदू कहने से हम इसे रिलिजन न मानें, यह किसी विशेष समुदाय का नाम नहीं है. इसे पूजा-कर्मकांड न मानें. हिंदू कोई संज्ञा नहीं, बल्कि विशेषण है. बाबर का पंजाब पर आक्रमण हुआ. गुरु नानक देव ने देश में सब अत्याचार देखा तो उन्होंने लिखा, खुरासान खसमाना कीआ, हिंदुस्तानु डराइआ, आपै दोसु न देई करता, जमु करि मुगलु चड़ाइआ. गुरु नानक ने अपनी वाणी में हिंदुस्थान का प्रयोग किया है. उन्होंने लिखा है कि इतने अत्याचार हुए कि न हिंदू महिलाओं का शील बचा, न मुस्लिम महिलाओं की अस्मत बची.
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