Raju Srivastav के निधन के साथ सामने आई ‘Virtual Autopsy’ की बात, जानिए क्या है यह तकनीक, जिससे बहुत से डॉक्टर भी हैं अंजान …

तृषा अग्रवाल, रायपुर. मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव (Raju Srivastav) ने 42 दिन अस्पताल में रहने के बाद दम तोड़ दिया है. उनके निधन से हर किसी की आंखें नम हो गई है. उनके निधन के साथ खबर आई कि उनका पोस्टमार्टम वर्चुअल तकनीक से किया गया है. लोगों में सहसा इस बात की जिज्ञासा पैदा हुई कि आखिर ‘वर्चुअल आटोप्सी’ है क्या, जिसके जरिए शरीर में बिना एक चीरा लगाए महज 15-20 मिनट में पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया. lalluram.com विशेषज्ञों की मदद से इस पूरी प्रक्रिया का आपके सामने खुलासा कर रहा है.

बता दें कि राजू श्रीवास्तव (Raju Srivastav) पहले इंसान नहीं है, जिनका ‘Virtual Autopsy’ किया गया है. पहले भी ‘Virtual Autopsy’ हुए हैं, लेकिन कोई नामी शख्सियत नहीं होने की वजह से तकनीक की चर्चा नहीं हुई. लेकिन राजू श्रीवास्तव के साथ यह बदल गया है. इसकी अब हर स्तर पर चर्चा हो रही है. बता दें कि ‘Virtual Autopsy’ नॉर्मल पोस्टमार्टम से काफी ज्यादा अलग है, जिसमें इंसान के शरीर में चीर-फाड़ नहीं की जाती है.

कैसे किया जाता है वर्चुअल पोस्टमार्टम

वर्चुअल पोस्टमार्टम को Virtopsy भी कहा जाता है. ये Virtual और Autopsy शब्द से मिलकर बनाया गया है. इस पोस्टमार्टम में शव की जांच के लिए पूरी तरह मशीनों की मदद ली जाती है. वर्चुअल पोस्टमार्टम की मशीनों में सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन भी शामिल हैं. Virtual Autopsy में सबसे खास बात ये होती है कि इसमें नॉर्मल पोस्टमार्टम से काफी कम समय लगता है. साथ ही मशीन की मदद से मौत की वजह को लेकर ज्यादा अच्छा अंदाजा मिल जाता है.

न कोई चीरा, न कोई कांट-छांट

Virtual Autopsy करने से धार्मिक भावनाएं आहत होने का भी कोई अर्थ नहीं है, क्योंकि इसमें शरीर पर किसी भी तरह का कोई कांट-छांट और चीर-फाड़ नहीं किया जाता. दरअसल, काफी संख्या में लोग ऐसे हैं, जो अपने लोगों का पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर देते हैं, क्योंकि इसमें शरीर के कई हिस्सों में चीरा लगाया जाता है. हालांकि, वर्चुअल पोस्टमार्टम में ऐसा कुछ नहीं होता है, जिससे धर्म का तर्क देने वाले लोगों को परेशानी भी नहीं होगी.

Virtual Autopsy में बिना चीर-फाड़ किए शरीर के अंदरुनी हिस्सों की स्थिति का पता चल जाता है.

कितना सटीक है वर्चुअल पोस्टमार्टम

साल 2018 में पैथोलॉजी की जानकारी देने वाले एक जर्नल में छपे आर्टिकल में वर्चुअल ऑटोप्सी और सामान्य पोस्टमार्टम के रिजल्ट कंपेयर किया गया था. जिसमें पाया गया कि दोनों ही तरह के पोस्टमार्टम के रिजल्ट लगभग एक जैसे ही थे. आर्टिकल के अनुसार, वर्चुअल ऑटोप्सी में 23 में से 15 मामलों में बिल्कुल सटीक जानकारी का आंकलन किया गया. वहीं एक शव ऐसा था, जिसका नॉर्मल पोस्टमार्टम में जो रिजल्ट आया, वही रिजल्ट वर्चुअल पोस्टमार्टम में मिला था.

समय के साथ विकसित हो रही तकनीक

जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोजाली डिपार्टमेंट से जुड़े डॉ. अरविंद नेरल ने लल्लूराम डॉट कॉम को बताया कि समय के साथ जैसे-जैसे तकनीक विकसित हो रही है, पोस्टमार्टम में भी बदलाव हो रहा है. पहले शाम 5 बजे के बाद पोस्टमार्टम की इजाजत नहीं थी, लेकिन केंद्र सरकार ने स्थल पर उचित प्रकाश की व्यवस्था होने पर रात को भी पोस्ट मार्टम की इजाजत दे दी है. इसी तरह आने वाले दिनों में वर्चुअल पोस्टमार्टम भी होंगे.

जरूरत पड़ने पर प्रदेश में भी होगा सिस्टम

डॉक्टर नेरल ने स्पष्ट किया कि हमारे प्रदेश में वर्चुअल पोस्टमार्टम न हुआ है, और न ही इसके लिए कोई व्यवस्था है. आगे जरूरत होने पर इसका सिस्टम विकसित हो सकता है. उन्होंने माना कि वर्चुअल पोस्टमार्टम का विषय उनके लिए नया है. वहीं राजू श्रीवास्तव को देश का पहला वर्चुअल पोस्टमार्टम कहने से इंकार करते हुए उन्होंने कहा कि पहले भी हुए होंगे, लेकिन इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है.

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